कटड़ा : नए साल के स्वागत और माता के दर्शनों की अभिलाषा लेकर कटड़ा पहुँचने वाले श्रद्धालुओं के लिए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) ने यात्रा नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के उद्देश्य से बोर्ड ने RFID (Radio Frequency Identification) कार्ड की वैधता और यात्रा की समय-सीमा को लेकर नए आदेश जारी किए हैं। ये नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
यात्रा पंजीकरण और RFID कार्ड के नए नियम
श्राइन बोर्ड के नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुसार, अब माता के दरबार जाने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के लिए यात्रा पंजीकरण के साथ-साथ RFID कार्ड प्राप्त करना अनिवार्य है। नियमों में सबसे बड़ा बदलाव इसकी वैधता अवधि को लेकर किया गया है:
- 12 घंटे के भीतर शुरुआत: श्रद्धालु को RFID कार्ड प्राप्त करने के 12 घंटे के भीतर बाणगंगा या मुख्य प्रवेश द्वार से अपनी चढ़ाई शुरू करनी होगी। यदि इस समय सीमा में यात्रा शुरू नहीं की गई, तो कार्ड अमान्य हो जाएगा।
- 24 घंटे में वापसी अनिवार्य: पहली बार बोर्ड ने यात्रा पूरी करने की भी एक निश्चित समय-सीमा तय की है। अब श्रद्धालुओं को यात्रा शुरू करने के 24 घंटे के भीतर माता के दर्शन कर आधार शिविर कटड़ा वापस लौटना अनिवार्य होगा।
इससे पहले, कार्ड मिलने के बाद चढ़ाई शुरू करने की समय-सीमा तो तय थी, लेकिन वापसी के लिए कोई निश्चित अवधि निर्धारित नहीं थी। अब यात्रा के इस “टाइम-बाउंड” (समय-बद्ध) होने से भवन पर भीड़ का दबाव कम होने की उम्मीद है।
भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
दिसंबर के अंतिम सप्ताह और नए साल के शुरुआती दिनों में माता वैष्णो देवी में भारी भीड़ उमड़ती है। 2022 की शुरुआत में हुई दुखद भगदड़ जैसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए बोर्ड प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) ने हाल ही में सुरक्षा एजेंसियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में पुलिस, CRPF और श्राइन बोर्ड के सुरक्षा दस्ते की तैनाती के साथ-साथ मल्टी-टियर सिक्योरिटी ग्रिड (बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा) तैयार किया गया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीमें (QRT) तैनात की गई हैं। आधुनिक सर्विलांस टूल्स और सीसीटीवी के जरिए पूरे मार्ग की 24 घंटे निगरानी की जा रही है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बढ़ाया गया समय
जहाँ एक ओर नियमों को सख्त किया गया है, वहीं दूर-दराज से आने वाले यात्रियों की सुविधा का भी ध्यान रखा गया है:
- देर रात तक कार्ड की उपलब्धता: कटड़ा रेलवे स्टेशन के पास स्थित पंजीकरण केंद्रों पर अब रात 12 बजे तक RFID कार्ड प्राप्त किए जा सकते हैं। पहले यह सेवा केवल रात 10 बजे तक उपलब्ध थी।
- 24 घंटे सेवा: जो श्रद्धालु ट्रेन या अन्य माध्यमों से देर रात कटड़ा पहुँचते हैं, वे मुख्य प्रवेश द्वार ‘दर्शन डियोड़ी’ पर स्थापित काउंटर से 24 घंटे कभी भी कार्ड प्राप्त कर सकते हैं।
यात्रा के साधन और समय का गणित
कटड़ा से माता के भवन की दूरी लगभग 13 किलोमीटर है। श्रद्धालुओं के लिए चढ़ाई के विभिन्न विकल्प उपलब्ध हैं:
- पैदल यात्रा: इसमें औसतन 6 से 8 घंटे लगते हैं।
- अन्य साधन: घोड़े, पिट्ठू, पालकी, बैटरी कार और हेलीकॉप्टर की सुविधा भी उपलब्ध है।
बोर्ड का मानना है कि सामान्यतः एक स्वस्थ श्रद्धालु 24 से 36 घंटे में पूरी यात्रा (आना-जाना और दर्शन) कर लेता है। नए नियमों के तहत 24 घंटे की समय-सीमा उन यात्रियों के लिए है जो दर्शन कर तुरंत वापस लौटना चाहते हैं, ताकि भवन परिसर में ठहरने वाले लोगों की संख्या को नियंत्रित किया जा सके।
श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण नोट: यह नियम पैदल यात्रा करने वालों के साथ-साथ हेलीकॉप्टर और बैटरी कार का उपयोग करने वाले यात्रियों पर भी समान रूप से लागू होंगे। अपनी यात्रा की योजना इसी समय-सीमा को ध्यान में रखकर बनाएं।
