बेंगलुरु | 02 जनवरी 2026: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के सीमावर्ती इलाकों में स्थित खदानों में होने वाले अवैध विस्फोट वन्यजीवों के लिए काल बन गए हैं। हाल ही में बेंगलुरु के पास बसवंतारा वन क्षेत्र में एक मादा तेंदुए और उसके गर्भ में पल रहे तीन शावकों की दर्दनाक मौत ने पर्यावरण प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना के बाद कर्नाटक सरकार हरकत में आई है और वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरी घटना?
जानकारी के अनुसार, बेंगलुरु सिटी डिवीजन के कग्गलीपुरा रेंज में वन अधिकारी जब नियमित गश्त (पेट्रोलिंग) पर थे, तब उन्हें एक तेंदुए का शव मिला। शुरुआती जांच में पता चला कि यह 3 से 4 साल की मादा तेंदुआ थी। जब शव का पोस्टमार्टम किया गया, तो डॉक्टर और वन विभाग के अधिकारी दंग रह गए; मादा तेंदुए के गर्भ में तीन अजन्मे शावक थे। इस तरह एक साथ चार तेंदुओं की जान चली गई।
मौत का कारण: पत्थरों की भारी ब्लास्टिंग
वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने बताया कि मादा तेंदुए की मौत 27 दिसंबर 2025 को सर्वे नंबर 51 में हुई थी। पोस्टमार्टम और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट से संकेत मिले हैं कि तेंदुए की मौत प्राकृतिक नहीं थी। पास की खदानों में पत्थरों को तोड़ने के लिए किए गए ‘हैवी रॉक ब्लास्टिंग’ (विस्फोट) के झटके इतने शक्तिशाली थे कि उनकी चपेट में आने से मादा तेंदुए की मौत हो गई।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
इस घटना पर यशवंतपुर के विधायक एस.टी. सोमशेखर ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र के भीतर अवैध खनन गतिविधियां धड़ल्ले से चल रही हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए वन मंत्री ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
गहन जांच: यह पता लगाया जाए कि क्या जंगल की सीमा के भीतर अवैध खनन हो रहा है।
FIR दर्ज: वन विभाग ने इस मामले में पहले ही प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।
दोषियों पर एक्शन: जो खदान मालिक या व्यक्ति इस जानलेवा ब्लास्टिंग के लिए जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वन्यजीवों की सुरक्षा पर खड़े हुए सवाल
बेंगलुरु जैसे महानगर के आसपास बढ़ते शहरीकरण और अवैध खनन ने जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास को खतरे में डाल दिया है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि मानवीय लालच के कारण बेगुनाह वन्यजीवों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
