जयपुर, 8 जनवरी, 2026 – scam in Rajasthan’s mid-day meal scheme राजस्थान में सरकारी स्कूलों के बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए संचालित ‘राज्य मिड-डे मील योजना’ में एक बहुत बड़े भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। शुरुआती जांच और रिपोर्टों के अनुसार, खाद्यान्न वितरण और आवंटन के नाम पर लगभग 2000 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। इस समाचार ने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
घोटाले का तरीका
जांच में सामने आया है कि यह घोटाला मुख्य रूप से कागजों पर खाद्यान्न की फर्जी एंट्री के जरिए किया गया। स्कूलों में नामांकित बच्चों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया और उसी आधार पर सरकार से अतिरिक्त खाद्यान्न और बजट उठाया गया। वास्तविकता यह थी कि जितना अनाज सरकारी गोदामों से निकला, उतना बच्चों की थाली तक कभी पहुँचा ही नहीं। आपूर्ति श्रृंखला के बीच में ही अनाज को खुले बाजार में बेच दिया गया और फर्जी बिलों के माध्यम से भुगतान उठा लिया गया।
मिलीभगत का बड़ा जाल
सूत्रों के मुताबिक, इस घोटाले में शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी, खाद्यान्न आपूर्तिकर्ता (सप्लायर) और कुछ स्थानीय वितरकों की गहरी मिलीभगत होने की आशंका है। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि कई जिलों में निरीक्षण के दौरान भंडार गृहों में अनाज का स्टॉक रजिस्टर से मेल नहीं खाया। कई स्कूलों में तो मिड-डे मील के रिकॉर्ड में उन बच्चों के नाम भी शामिल थे, जो लंबे समय से स्कूल ही नहीं आ रहे थे।
प्रशासनिक कार्रवाई
इस मामले के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) और विशेष टीमें अब उन सभी टेंडरों और भुगतान फाइलों की जांच कर रही हैं, जो पिछले कुछ वर्षों के दौरान जारी की गई थीं। सरकार का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जो भी अधिकारी इस भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रमुख जिले और प्रभावित क्षेत्र
रिपोर्टों के अनुसार, जांच का दायरा राजस्थान के कई जिलों तक फैला हुआ है। इनमें विशेष रूप से जयपुर, जोधपुर, बीकानेर और उदयपुर जैसे बड़े जिले रडार पर हैं। इन जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में खाद्यान्न की खपत और वितरण में सबसे अधिक विसंगतियां पाई गई हैं। बताया जा रहा है कि आदिवासी बहुल इलाकों और दूर-दराज के गांवों में निगरानी की कमी का फायदा उठाकर इस धांधली को अंजाम दिया गया।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई और गिरफ्तारियां
एसीबी (ACB) की कार्रवाई: राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने कई जिलों के ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEO) और मिड-डे मील प्रभारियों के कार्यालयों पर छापेमारी की है। कई जगहों पर स्टॉक रजिस्टर और डिजिटल एंट्री में भारी अंतर मिला है।
सप्लायरों पर शिकंजा: घोटाले के मुख्य केंद्र के रूप में उन निजी सप्लायरों को देखा जा रहा है जिनके पास अनाज की ढुलाई का जिम्मा था। पुलिस और जांच एजेंसियों ने कुछ प्रमुख सप्लायरों के गोदामों को सील किया है।
गिरफ्तारियां और पूछताछ: अब तक कुछ जिला स्तरीय लिपिकों (Clerks) और ठेकेदारों के सहायकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। हालांकि, किसी “बड़े नाम” की आधिकारिक गिरफ्तारी की पुष्टि अभी प्रतीक्षित है, लेकिन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
मुख्य दस्तावेजी सबूत
जांच टीमों को ‘फूड कूपन’ और ‘यूटीलाइजेशन सर्टिफिकेट’ (उपयोगिता प्रमाण पत्र) में गड़बड़ी के पुख्ता सबूत मिले हैं। कई स्कूलों में मध्याह्न भोजन के लिए गैस सिलेंडरों की संख्या और अनाज की मात्रा का कोई तालमेल नहीं मिल रहा है, जिससे यह साफ होता है कि अनाज बच्चों तक पहुंचने के बजाय सीधे बाजार में बेचा गया।
