सना/रियाद: यमन में सत्ता और वर्चस्व की लड़ाई ने एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। शुक्रवार को सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने यूएई (UAE) समर्थित सदरन ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए। इस हमले में कम से कम 20 अलगाववादी लड़ाकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
एयरपोर्ट ठप, पहली बार हुआ सीधा आमना-सामना
यह हमला अल खाशा और सेयून स्थित सैन्य ठिकानों पर किया गया। सऊदी अरब ने सेयून शहर के एयरपोर्ट को भी निशाना बनाया, जिससे वहां विमानों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। यह पहली बार है जब सऊदी गठबंधन ने सीधे तौर पर अपने ही सहयोगी यूएई द्वारा समर्थित STC के ठिकानों पर बमबारी की है।
क्या यमन के दो टुकड़े होंगे?
इस सैन्य कार्रवाई ने यमन के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दक्षिण यमन में हुई इस घटना ने सऊदी अरब और यूएई को पहली बार आमने-सामने खड़ा कर दिया है। हमले के बाद STC ने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा है कि “अब युद्ध शुरू हो चुका है।” STC का आरोप है कि सऊदी समर्थित जमीनी बलों ने उन पर हमला किया, जिसे सऊदी वायुसेना ने कवर दिया।
यूएई की प्रतिक्रिया और STC के आरोप
हमले से ठीक पहले यूएई ने घोषणा की थी कि उसकी आखिरी सैन्य टुकड़ी यमन छोड़ चुकी है। हालांकि, STC के प्रतिनिधि अम्र अल बिध ने सऊदी अरब पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ शांतिपूर्ण अभियान की बात की जा रही थी और दूसरी तरफ चंद मिनटों के भीतर सात हवाई हमले कर दिए गए।
यमन विवाद की पृष्ठभूमि
शुरुआत: 2014 में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा किया।
गठबंधन: 2015 में सऊदी अरब और यूएई ने मिलकर हूतियों के खिलाफ अभियान शुरू किया।
वर्तमान स्थिति: वर्षों की हिंसा और भुखमरी झेलने के बाद अब हूतियों के खिलाफ बना यह गठबंधन खुद अंदरूनी कलह का शिकार हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सऊदी अरब और यूएई के बीच यह दरार कम नहीं हुई, तो यमन का विभाजन अब एक वास्तविक संभावना नजर आ रही है।
