अहमदाबाद/गांधीनगर: गुजरात सरकार ने राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कला को वैश्विक मंच देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब गुजरात के प्रमुख हवाई अड्डों पर विशेष हस्तशिल्प (Handicraft) स्टोर शुरू किए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देना और पर्यटकों को गुजरात की विश्वप्रसिद्ध कलाकृतियों से रूबरू कराना है।
स्थानीय कारीगरों के लिए नए अवसर
गुजरात अपनी विविध कलाओं जैसे कि कच्छी कढ़ाई, पटोला सिल्क, बांधनी, रोगन आर्ट, और टेराकोटा के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। अब तक इन कारीगरों को अपने उत्पाद बेचने के लिए स्थानीय बाजारों या प्रदर्शनियों पर निर्भर रहना पड़ता था। हवाई अड्डों पर स्टोर खुलने से इन सूक्ष्म और लघु उद्योगों से जुड़े हजारों कारीगरों को सीधा बाजार मिलेगा।
पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र
अहमदाबाद का ‘सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा’, सूरत, राजकोट और वडोदरा जैसे व्यस्त हवाई अड्डों पर हर साल लाखों देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। अक्सर पर्यटक यादगार के तौर पर कुछ स्थानीय चीजें खरीदना चाहते हैं। इन स्टोर्स के माध्यम से उन्हें एक ही छत के नीचे राज्य के बेहतरीन और प्रामाणिक (Authentic) उत्पाद मिल सकेंगे।
इन उत्पादों की होगी भरमार
हवाई अड्डों पर खुलने वाले इन स्टोर्स में निम्नलिखित विशेष उत्पाद मिलने की संभावना है:
- पाटन का पटोला: अपनी बारीक बुनाई के लिए मशहूर सिल्क साड़ियां।
- कच्छी हस्तशिल्प: हाथ से की गई कढ़ाई वाले बैग, कपड़े और घर की सजावट का सामान।
- पीथोरा पेंटिंग: आदिवासी समुदाय की पारंपरिक और जीवंत कला।
- तांबे और पीतल के बर्तन: सिहोर और जामनगर की प्रसिद्ध धातु कला।
- लकड़ी के खिलौने: ईडर और महुवा के पारंपरिक लकड़ी के खिलौने।
‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को साकार करने की दिशा में यह गुजरात सरकार की एक सराहनीय पहल है। ‘इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन ब्यूरो’ (iNDEXTb) और ‘गुजरात राज्य हस्तशिल्प विकास निगम’ (Garvi Gurjari) इस परियोजना के कार्यान्वयन में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
निष्कर्ष
हवाई अड्डों पर इन आउटलेट्स की शुरुआत न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी, बल्कि लुप्त हो रही कुछ प्राचीन कलाओं को पुनर्जीवित करने में भी मदद करेगी। यह कदम अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के बीच गुजरात की एक “ब्रांड इमेज” बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।
