नई दिल्ली: अमेरिका में उच्च कुशल विदेशी कर्मचारियों के बीच सबसे लोकप्रिय वीज़ा, एच-1बी (H-1B) और उनके आश्रितों के लिए एच-4 (H-4) वीज़ा आवेदकों के लिए आज, 15 दिसंबर, 2025 से नियमों में बड़ा बदलाव आया है। अमेरिकी सरकार ने वीज़ा आवेदन प्रक्रिया को और सख्त करते हुए अब आवेदकों की सोशल मीडिया प्रोफाइल की अनिवार्य और कड़ी जांच शुरू कर दी है।
सोशल मीडिया की सार्वजनिक जाँच
इस नए नियम के तहत, सभी H-1B और H-4 वीज़ा आवेदकों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर (X), लिंक्डइन और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स को ‘पब्लिक’ करने का निर्देश दिया गया है। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने और यह जांचने के लिए उठाया गया है कि आवेदक अमेरिका में प्रवेश की शर्तों के अनुरूप गतिविधियों में शामिल होने का इरादा रखते हैं या नहीं।
भारतीयों पर सबसे बड़ा असर
यह फैसला उन हजारों भारतीय पेशेवरों के लिए चिंता का विषय बन गया है जो हर साल बड़ी संख्या में H-1B वीज़ा प्राप्त करते हैं। आँकड़ों के अनुसार, अमेरिका में 70% से अधिक H-1B वीज़ा भारतीयों को जारी किए जाते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि अब आवेदकों को अपनी पूरी डिजिटल लाइफ की सावधानीपूर्वक समीक्षा करनी होगी। कोई भी असंगत, संदिग्ध या आपत्तिजनक पोस्ट (मज़ाक में की गई भी) वीज़ा अस्वीकृति का कारण बन सकती है। यह नियम केवल नए आवेदनों पर ही नहीं, बल्कि वीज़ा रिन्यूअल पर भी लागू होगा।
आवेदन प्रक्रिया में अनिश्चितता और देरी
कड़ी जांच के कारण वीज़ा अपॉइंटमेंट्स में पहले ही अनिश्चितता और देरी देखने को मिल रही है। कई भारतीय शहरों में दिसंबर के लिए निर्धारित इंटरव्यू स्लॉट्स को रद्द कर दिया गया है या मार्च 2026 तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। इससे उन कंपनियों की कार्यबल योजना और हायरिंग रणनीतियों पर भी असर पड़ रहा है जो विदेशी प्रतिभा पर निर्भर हैं।
इसके अतिरिक्त, सितंबर 2025 में, नए H-1B याचिकाओं पर एक लाख अमेरिकी डॉलर ($100,000) का एक बार का शुल्क भी घोषित किया गया था, जिसने नई याचिकाओं पर अतिरिक्त लागत जोड़ दी है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि वीज़ा पाना एक अधिकार नहीं, बल्कि एक खास अनुमति है, और हर मामले में आवश्यक समय लिया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई आवेदक अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा न हो।
