नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश में तंबाकू के सेवन को नियंत्रित करने और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से ‘सिन गुड्स’ (Sin Goods) पर टैक्स की दरों में भारी बढ़ोतरी की है। 31 दिसंबर, 2025 को वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब पान मसाला, सिगरेट और चबाने वाले तंबाकू पर मौजूदा क्षतिपूर्ति उपकर (Compensation Cess) की जगह नया स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर (Health and National Security Cess) और अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लिया जाएगा।
क्या है नया टैक्स स्ट्रक्चर?
1 फरवरी से लागू होने वाले नियमों के तहत टैक्स का गणित कुछ इस प्रकार होगा:
- GST की दर: पान मसाला, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी की दर को बढ़ाकर 40% कर दिया गया है।
- बीड़ी पर रियायत: हालांकि, बीड़ी पर राहत बरकरार रखते हुए इस पर केवल 18% GST लगाया जाएगा।
- अतिरिक्त शुल्क: 40% GST के ऊपर पान मसाला पर ‘हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस’ लगेगा, जबकि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Additional Excise Duty) लगाया जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में स्पष्ट किया था कि इस नए सेस का मुख्य उद्देश्य दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों—जन स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक समर्पित और निरंतर संसाधन जुटाना है। सरकार का मानना है कि इन हानिकारक उत्पादों की कीमतें बढ़ने से इनके सेवन में कमी आएगी, जिसका सीधा सकारात्मक असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
उत्पादन क्षमता पर लगेगा सेस
नए नियमों की एक खास बात यह है कि अब पान मसाला और गुटखा बनाने वाली कंपनियों पर टैक्स केवल बिक्री के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी मशीन की उत्पादन क्षमता के आधार पर भी लगेगा।
- सरकार ने ‘चबाने वाला तंबाकू, जर्दा और गुटखा पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण और शुल्क संग्रह) नियम, 2026’ अधिसूचित किए हैं।
- इसके तहत, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में लगी मशीनों की संख्या और उनकी गति के आधार पर मासिक सेस निर्धारित होगा। इससे कर चोरी (Tax Evasion) पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।
बाजार और जनता पर असर
इस घोषणा के बाद शेयर बाजार में सिगरेट और तंबाकू बनाने वाली बड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई है। आईटीसी (ITC) और गॉडफ्रे फिलिप्स जैसे स्टॉक्स में 10% से 16% तक की गिरावट दर्ज की गई।
आम जनता के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि 1 फरवरी से सिगरेट का हर कश और पान मसाला का हर पैकेट काफी महंगा हो जाएगा। सिगरेट की लंबाई के आधार पर उस पर लगने वाला अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये प्रति 1,000 स्टिक तक हो सकता है।
राज्यों को भी मिलेगा हिस्सा
केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि इस सेस से होने वाली आय का एक हिस्सा राज्य सरकारों के साथ भी साझा किया जाएगा। इस राशि का उपयोग स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों और विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं को लागू करने के लिए किया जाएगा।
