मॉस्को/नई दिल्ली: कहते हैं कि काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बस उसकी कीमत सही मिलनी चाहिए। भारत के एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने इस बात को सच कर दिखाया है। 26 वर्षीय मुकेश मंडल, जो कभी दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट में सॉफ्टवेयर डेवलपर के तौर पर काम करते थे, आज रूस की सड़कों पर सफाई कर्मचारी (Road Cleaner) के रूप में काम कर रहे हैं।
भारत की इंजीनियरिंग छोड़ रूस में सफाई क्यों?
मुकेश मंडल करीब चार महीने पहले रूस गए थे। वहां वह ‘कोलोम्याइकोये’ नामक एक रोड मेंटेनेंस कंपनी में काम कर रहे हैं। जब उनसे उनके करियर स्विच के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही व्यावहारिक कारण बताया:
तगड़ी सैलरी: मुकेश को सफाई कर्मी के तौर पर महीने के 1 लाख रूबल (लगभग 1.1 लाख भारतीय रुपये) मिलते हैं।
बचत ही बचत: मुकेश का कहना है कि यह राशि भारत में एक सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में उनकी कमाई से भी अधिक है। ऊपर से कंपनी उनके रहने, खाने, वीजा और परिवहन का सारा खर्च खुद उठा रही है, जिससे उनकी पूरी सैलरी बच जाती है।
17 भारतीयों का समूह कर रहा है काम
रूस में सिर्फ मुकेश ही नहीं, बल्कि 19 से 43 वर्ष की आयु के कुल 17 भारतीयों का एक समूह इस कंपनी में काम कर रहा है। रूस में फिलहाल लेबर की भारी कमी है, जिसके कारण वहां की सरकार ने भारत सहित अन्य देशों से श्रमिकों को बुलाने की मंजूरी दी है।
“काम की इज्जत करता हूं, हमेशा के लिए यहां नहीं रहना”
मुकेश मंडल ने गर्व के साथ कहा, “मैं मुख्य रूप से एक डेवलपर हूं और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। लेकिन मैं काम को सबसे ऊपर रखता हूं। मैं यहां सड़कों की सफाई का काम पूरी इज्जत के साथ करता हूं क्योंकि मैं अच्छी कमाई कर रहा हूं।” उनका इरादा रूस में बसने का नहीं है। वह कुछ साल यहां काम करके पैसा जमा करना चाहते हैं और फिर वापस भारत लौटकर अपना भविष्य संवारना चाहते हैं।
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