11 दिसंबर 2025: प्रदोष काल: हिंदू धर्मशास्त्रों में ‘प्रदोष काल’ को अत्यंत पवित्र और परम शुभ समय माना गया है। यह वह समय होता है जब दिन और रात का मिलन होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र समय में ब्रह्मांड में दिव्य ऊर्जा का प्रवाह अत्यधिक बढ़ जाता है। यदि इस अवधि के दौरान कोई भी पूजा-साधना की जाती है, तो साधक को उसका कई गुना फल प्राप्त होता है।
प्रदोष काल की अवधि भगवान शिव को समर्पित
प्रदोष काल का समय सूर्यास्त होने के बाद शुरू होता है और लगभग 48 मिनट तक रहता है। यह संपूर्ण अवधि देवों के देव भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि प्रदोष काल के दौरान भगवान महादेव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं, इसलिए इस समय आराधना करने से कई गुना फल प्राप्त होता है।
प्रदोष काल में अवश्य करने योग्य शुभ कार्य
शिव उपासना के लिए प्रदोष काल को सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है। इस पवित्र समय के दौरान किए गए कुछ सरल उपाय जीवन की समस्याओं का अंत करते हैं और मन को शांति प्रदान करते हैं।
1. शिवलिंग की विधिवत पूजा करें
प्रदोष काल का आरंभ होते ही स्नान करके पास के शिव मंदिर जाना चाहिए। यदि मंदिर जाना संभव न हो, तो घर पर ही शिवलिंग का पूजन करना उत्तम माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस आराधना से विवाह में आने वाली बाधाएं, व्यापारिक समस्याएं और स्वास्थ्य संबंधी कष्टों का निवारण होता है। भक्तों को सफेद चंदन से ‘ॐ’ लिखकर बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित करने चाहिए, उसके बाद एक लोटा स्वच्छ जल या कच्चा दूध चढ़ाना चाहिए और भगवान शिव को खीर, गुड़ या यथानुसार अन्य भोग अर्पित करना चाहिए।
2. महामृत्युंजय मंत्र का दिव्य जाप
प्रदोष काल में किसी शांत और एकांत जगह पर आसन लगाकर बैठें। इसके बाद रुद्राक्ष की माला से महामृत्युंजय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह शक्तिशाली मंत्र मानसिक शांति प्रदान करता है, सभी प्रकार के भय को दूर करता है और शरीर को सकारात्मक ऊर्जा से मजबूत बनाता है।
3. घर के मुख्य द्वार पर दीप प्रज्ज्वलन
जब प्रदोष काल शुरू हो, तो घर के मुख्य दरवाजे के दोनों ओर शुद्ध घी के दीपक जलाने चाहिए। शास्त्र सम्मत मान्यता है कि यह क्रिया करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और धन-वैभव की देवी माँ लक्ष्मी की अटूट कृपा बनी रहती है।
