रियाद/तेहरान: पश्चिम एशिया (West Asia) में पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति (War-like situation) बनी हुई है। वाशिंगटन की ओर से ईरान को लगातार सैन्य हमले (Military attack) की धमकियाँ मिल रही हैं। हालांकि, इस संकट के बीच इस्लामिक देशों से एक ऐसी खबर आई है जिसने दुनिया के भू-राजनीतिक विशेषज्ञों (Geopolitical experts) को हैरान कर दिया है। दशकों से एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंद्वी (Arch-rivals) माने जाने वाले साउदी अरब और ईरान अब एक मंच पर आते दिख रहे हैं।
साउदी अरब का ईरान को बड़ा आश्वासन
साउदी अरब ने ईरान को स्पष्ट रूप से यह आश्वासन (Assurance) दिया है कि वह अमेरिका या किसी अन्य देश को ईरान के खिलाफ हमला करने के लिए अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र (Airspace) का उपयोग करने की अनुमति नहीं देगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि अमेरिका ईरान पर हमले की योजना बनाता है, तो वह साउदी अरब में स्थित अपने सैन्य अड्डों (Military bases) का उपयोग नहीं कर पाएगा।
साउदी विदेश मंत्रालय (Ministry of Foreign Affairs) के सूत्रों के अनुसार:
“हमने ईरान को स्पष्ट कर दिया है कि साउदी अरब उसके खिलाफ किसी भी गठबंधन (Coalition) का हिस्सा नहीं बनेगा। हम अपने हवाई क्षेत्र से ऐसे किसी भी लड़ाकू विमान (Fighter jet) को गुजरने नहीं देंगे जिसका लक्ष्य ईरान पर हमला करना हो।”
यह कदम क्यों महत्वपूर्ण है? (Why is this step important?)
शिया-सुन्नी मतभेदों में कमी: ऐतिहासिक रूप से साउदी अरब (सुन्नी) और ईरान (शिया) के बीच गहरा वैमनस्य रहा है। यह कदम इस्लामिक देशों के बीच बढ़ती एकता (Unity) का एक बड़ा संकेत है।
अमेरिका के लिए बड़ा झटका (Setback for USA): साउदी अरब को अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी (Closest ally) माना जाता है। इसके बावजूद, ईरान के मामले में उसने तटस्थ रहने के बजाय ईरान की संप्रभुता का पक्ष लिया है।
पाकिस्तान की चुप्पी (Pakistan’s Silence): एक तरफ जहां साउदी अरब ने साहसी रुख अपनाया है, वहीं दूसरी ओर ‘इस्लामिक एकजुटता’ की दुहाई देने वाला पाकिस्तान वर्तमान में खामोश है। पाकिस्तान की ओर से अब तक ईरान के समर्थन में कोई आधिकारिक बयान (Official statement) नहीं आया है।
तनाव का मुख्य कारण (Reason for Tension)
अमेरिका ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों (Protests) और प्रदर्शनकारियों पर की गई सख्ती का हवाला देते हुए सैन्य हस्तक्षेप (Military intervention) की धमकी दी है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ईरान ने पहले ही अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद कर दिया है।
मध्य-पूर्व (Middle East) में अमेरिका के कई सैन्य ठिकाने हैं। साउदी अरब के इस इनकार के बाद अब अमेरिका के लिए ईरान के खिलाफ कोई भी प्रभावी सैन्य कार्रवाई (Military action) करना अत्यंत कठिन हो सकता है।
साउदी अरब का यह फैसला न केवल क्षेत्रीय शांति (Regional peace) की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह बदलते वैश्विक समीकरणों (Global equations) को भी दर्शाता है जहाँ अब अरब देश अपने फैसलों में अधिक स्वतंत्र (Independent) दिखाई दे रहे हैं।
TO JOIN OUR WHATSAPP GROUP PL CLICL BELOW
https://chat.whatsapp.com/Kfi1IUcU30h55YYfM90XxJ
