दुबई/रियाद: मिडिल ईस्ट (Middle East) की राजनीति में आज एक ऐसा भूचाल आ गया है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। दशकों तक एक-दूसरे के सबसे करीबी सहयोगी (Closest Allies) रहे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब युद्ध के मुहाने पर खड़े हैं। सऊदी अरब ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार करते हुए यूएई को मात्र 24 घंटे का अल्टीमेटम (24-hour Ultimatum) दे दिया है।
यह विवाद इतना गहरा गया है कि सऊदी अरब ने यमन के एक प्रमुख बंदरगाह शहर (Port City) पर हवाई हमले भी शुरू कर दिए हैं। विशेषज्ञों (Experts) का मानना है कि अगर अगले कुछ घंटों में कूटनीतिक समाधान (Diplomatic Solution) नहीं निकला, तो यह संघर्ष पूरे अरब प्रायद्वीप की स्थिरता (Stability) को खतरे में डाल सकता है।
क्या है विवाद की असली वजह? (What is the Real Cause of Conflict?)
इस पूरे विवाद की जड़ यमन (Yemen) का गृहयुद्ध है। हालांकि दोनों देश यमन में हूती विद्रोहियों (Houthis) के खिलाफ एक साथ लड़ रहे थे, लेकिन अब उनके हितों में टकराव (Conflict of Interests) पैदा हो गया है।
मुकल्ला पर बमबारी (Bombing on Mukalla): सऊदी अरब ने मंगलवार को यमन के बंदरगाह शहर मुकल्ला पर भीषण हवाई हमले (Air Strikes) किए। सऊदी का दावा है कि उसने उन हथियारों और सैन्य वाहनों को निशाना बनाया जो यूएई द्वारा अलगाववादियों (Separatists) को सप्लाई किए गए थे।
हथियारों की गुप्त सप्लाई: सऊदी अरब की प्रेस एजेंसी (Saudi Press Agency) के अनुसार, यूएई के फुजैराह बंदरगाह से हथियारों से लदे जहाज मुकल्ला पहुंचे थे। इन जहाजों ने अपनी ट्रैकिंग डिवाइस (Tracking Devices) को बंद कर दिया था ताकि सऊदी की नजरों से बच सकें।
राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा (Threat to National Security): सऊदी अरब ने सीधे तौर पर यूएई पर आरोप लगाया है कि उसके कार्य सऊदी की सुरक्षा के लिए ‘अत्यधिक खतरनाक’ हैं और वह यमन में अपने भाड़े के सैनिकों (Mercenaries) के जरिए अस्थिरता फैला रहा है।
सऊदी का 24 घंटे का अल्टीमेटम (Saudi’s 24-hour Ultimatum)
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के नेतृत्व में रियाद ने अबू धाबी को स्पष्ट चेतावनी जारी की है। इस अल्टीमेटम में मुख्य रूप से तीन बातें कही गई हैं:
सेना की वापसी: यूएई 24 घंटे के भीतर यमन से अपनी सभी सेनाओं और समर्थित लड़ाकों को वापस बुला ले।
सहायता पर रोक: यमनी अलगाववादी गुटों (Southern Transitional Council – STC) को दी जाने वाली सैन्य और वित्तीय सहायता (Military & Financial Aid) तुरंत बंद की जाए।
गठबंधन का उल्लंघन: सऊदी ने कहा है कि यूएई की गतिविधियां गठबंधन की शर्तों का उल्लंघन (Violation of Terms) हैं और इसका ‘पुरजोर जवाब’ दिया जाएगा।
आर्थिक और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा (Economic & Regional Competition)
भले ही यह युद्ध यमन की धरती पर लड़ा जा रहा हो, लेकिन इसकी असली लड़ाई क्षेत्रीय वर्चस्व (Regional Dominance) की है।
आर्थिक होड़: पिछले कुछ वर्षों में सऊदी अरब और यूएई के बीच आर्थिक मुद्दों पर प्रतिस्पर्धा (Competition) बढ़ी है। सऊदी अरब अब दुबई की तर्ज पर खुद को एक वैश्विक पर्यटन और व्यापार केंद्र (Trade Hub) के रूप में स्थापित करना चाहता है, जो यूएई के बिजनेस मॉडल के लिए एक चुनौती है।
यमन के संसाधनों पर कब्ज़ा: यूएई यमन के दक्षिणी तटों और बंदरगाहों पर अपना प्रभाव चाहता है ताकि वह समुद्री व्यापार मार्गों (Maritime Trade Routes) को नियंत्रित कर सके, जबकि सऊदी अरब पूरे यमन में एक स्थिर और अपने प्रति वफादार सरकार चाहता है।
यमन में आपातकाल की घोषणा (Emergency in Yemen)
सऊदी के कड़े रुख के बाद, यमन के हूती-विरोधी बलों ने भी यूएई के साथ अपना सहयोग समाप्त करने का ऐलान कर दिया है।
बंदरगाहों पर पाबंदी: अगले 72 घंटों के लिए सभी हवाई अड्डों और बंदरगाहों (Airports & Ports) में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
अमीराती बलों को आदेश: यूएई समर्थित बलों को भी 24 घंटे के भीतर इलाका छोड़ने का आदेश दिया गया है।
सऊदी अरब और यूएई के बीच यह दरार केवल दो देशों का झगड़ा नहीं है, बल्कि यह अरब लीग (Arab League) और पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। यदि ये दो ताकतवर देश आपस में भिड़ते हैं, तो कच्चे तेल की कीमतें (Crude Oil Prices) आसमान छू सकती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) चरमरा सकती है। अब सबकी निगाहें अबू धाबी के जवाब पर टिकी हैं—क्या वे पीछे हटेंगे या खाड़ी क्षेत्र एक नए युद्ध की आग में झुलसेगा?
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