वडोदरा (Vadodara News): भारत की सांस्कृतिक नगरी वडोदरा अब केवल अपनी कला और संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) के मानचित्र पर भी अपनी चमक बिखेर रही है। वडोदरा की एक स्थानीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) इकाई ‘विविध हाईफ्रेब’ (Vividh Hyfab) ने वह कारनामा कर दिखाया है जो दुनिया के बड़े-बड़े विकसित देश भी नहीं कर पाए। तीन साल के गहन शोध और कड़ी मेहनत के बाद, इस इकाई ने परमाणु रिएक्टरों (Nuclear Reactors) में उपयोग किए जाने वाले तीन सबसे जटिल उपकरणों का स्वदेशी निर्माण किया है।
1. ‘स्वेन्ट फ्यूअल’ का सुरक्षित प्रबंधन: एक बड़ी चुनौती (Nuclear Waste Management)
परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में बिजली उत्पन्न करने के लिए यूरेनियम से भरे फ्यूअल रॉड्स (Fuel Rods) का उपयोग किया जाता है। जब इन रॉड्स की जीवन अवधि समाप्त हो जाती है, तब भी इनमें अत्यधिक गर्मी और जानलेवा रेडिएशन (Radiation) मौजूद रहता है।
रेडिएशन का खतरा: इन इस्तेमाल किए गए फ्यूअल रॉड्स को रिएक्टर से निकालने के बाद लगभग 6-7 साल तक ‘वॉटर पॉन्ड’ (Water Pond) में सुरक्षित रखना पड़ता है।
परिवहन की जटिलता: इसके बाद, इन्हें प्लांट से बाहर ले जाने के लिए ऐसे कंटेनरों और मशीनों की जरूरत होती है जो रेडिएशन को बिल्कुल भी लीक न होने दें। अब तक भारत इन मशीनों के लिए रूस और अमेरिका जैसी विदेशी शक्तियों पर निर्भर था।
2. विश्व में पहली बार: तीन जटिल उपकरण एक ही छत के नीचे (World’s First Milestone)
वडोदરા की इस कंपनी ने इतिहास रचते हुए परमाणु ऊर्जा संयंत्र के तीन सबसे महत्वपूर्ण उपकरणों का निर्माण एक ही स्थान पर किया है:
फ्यूअल ट्रांसफर मशीन (Fuel Transfer Machine): जो सुरक्षित रूप से ईंधन की अदला-बदली करती है।
स्पेंट फ्यूअल ट्रांसपोर्टेशन कंटेनर (Spent Fuel Transportation Container): जो भारी रेडिएशन वाले ईंधन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित ले जाता है।
स्टोरेज रेक्स (Storage Racks): जहाँ ईंधन को वर्षों तक स्टोर किया जाता है।
यह दुनिया की पहली ऐसी घटना है जहाँ ये तीनों जटिल तकनीकें एक ही जगह विकसित की गई हैं।
3. बोरोटेड स्टेनलेस स्टील का ‘स्वदेशी’ जादू (Innovative Material)
इन उपकरणों को तैयार करने के लिए सबसे बड़ी चुनौती ऐसा मटेरियल खोजना था जो न्यूट्रॉन एमिशन (Neutron Emission) को रोक सके। वडोदरा की इस इकाई ने न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन (NPCIL) के सहयोग से विशेष ‘बोरोटेड स्टेनलेस स्टील’ (Borated Stainless Steel) का उपयोग करके SFSR (Spent Fuel Storage Racks) तैयार किए हैं।
केंद्र सरकार की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और कड़े वैज्ञानिक परीक्षणों में ये उपकरण पूरी तरह सफल साबित हुए हैं। यह तकनीक न केवल सुरक्षित है बल्कि भारत को परमाणु क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनाती है।
4. कुडनकुलम परमाणु संयंत्र में होगा उपयोग (Application at Kudankulam)
Vadodara में निर्मित उपकरणों का यह पहला जत्था तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Kudankulam Nuclear Power Plant) में भेजा जाएगा। आगामी कुछ ही दिनों में ‘फ्यूअल ट्रांसफर मशीन’ की डिलीवरी भी कर दी जाएगी। इससे भारत की विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत होगी और परमाणु सुरक्षा के क्षेत्र में भारत की स्वायत्तता (Autonomy) मजबूत होगी।
5. आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान (Symbol of Self-Reliant India)
प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को वडोदरा के इस छोटे से उद्यम ने नई ऊंचाइयों पर पहुँचा दिया है। एक स्थानीय MSME इकाई का वैश्विक स्तर के परमाणु उपकरण बनाना यह दर्शाता है कि भारत की इंजीनियरिंग और अनुसंधान क्षमता अब किसी भी विकसित देश से कम नहीं है।
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