बांग्लादेश | 02 जनवरी 2026 : बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। मैमनसिंह जिले के भालुका में दीपू चंद्र दास की नृशंस हत्या ने पूरी मानवता को शर्मसार कर दिया है। महज 27 साल की उम्र में भीड़ द्वारा जिंदा जला दिए गए दीपू का परिवार आज न्याय की भीख मांग रहा है और एक ऐसे सवाल के साथ खड़ा है जिसका जवाब किसी के पास नहीं है।
क्या थी पूरी घटना?
घटना बीते 18 दिसंबर की है। एक फैक्ट्री कार्यक्रम के दौरान भीड़ ने दीपू चंद्र दास पर ईशनिंदा (Blasphemy) का झूठा आरोप लगाया। उग्र भीड़ ने पहले उसे बेरहमी से पीटा और फिर हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए उसके शरीर को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी। यह घटना बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की ध्वस्त स्थिति का जीता-जागता प्रमाण है।
परिवार की चीखें और मासूम का भविष्य
दीपू की मौत ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। अब उसके पीछे उसकी 25 वर्षीय पत्नी मेघा और मात्र डेढ़ साल की मासूम बेटी रह गई है, जिनका भविष्य अब अंधकार में है।
आखिरी बातचीत: रोते हुए मेघा ने बताया कि हत्या से ठीक पहले शाम 4 बजे उसकी दीपू से बात हुई थी। उसे अंदाजा भी नहीं था कि यह उनकी आखिरी बात होगी।
मां की व्यथा: दीपू की मां ने सिसकते हुए कहा, “मैंने उसे फोन किया था, लेकिन वह सिर्फ ‘हेलो’ कह पाया और फोन कट गया। उसके बाद कभी उसकी आवाज नहीं सुनी।”
‘हम अपना देश छोड़कर क्यों जाएं?’
खौफ के साये में जीने के बावजूद दीपू के पिता ने दृढ़ता से एक बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, “यह हमारा देश है। हमारी पीढ़ियों ने यहां खून-पसीना बहाया है। हम अपना घर छोड़कर क्यों भागें? क्या सरकार हमें अपने ही देश में सुरक्षा नहीं दे सकती?” परिवार का आरोप है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है।
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने इस जघन्य अपराध की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बांग्लादेश की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा:
बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के गठन के बाद से अब तक हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ 2900 से अधिक हिंसा की घटनाएं दर्ज की गई हैं।
हिंदू, ईसाई और बौद्ध समुदायों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
भारत ने मांग की है कि बांग्लादेश सरकार दोषियों को तत्काल गिरफ्तार करे और उन्हें सख्त सजा दे।
सावधान करने वाली स्थिति: आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो हफ्तों में ही बांग्लादेश में भीड़ द्वारा 3 हिंदू युवकों की हत्या कर दी गई है। यह वहां के बिगड़ते सामाजिक ढांचे और अल्पसंख्यकों के प्रति बढ़ती नफरत का संकेत है।
| विवरण | जानकारी |
| मृतक | दीपू चंद्र दास (27 वर्ष) |
| स्थान | भालुका, मैमनसिंह जिला, बांग्लादेश |
| आरोप | ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाकर भीड़ द्वारा हत्या |
| परिवार | पत्नी (25 वर्ष) और बेटी (1.5 वर्ष) |
| भारत का रुख | कड़ा विरोध और दोषियों को सजा की मांग |
