असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Assam CM Himanta Biswa Sarma) से जुड़े एक कथित शूटिंग वीडियो (Shooting Video Controversy) को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जनहित याचिका (Public Interest Litigation – PIL) दाखिल की गई है। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि संवैधानिक पदों (Constitutional Positions) पर बैठे कुछ लोग लगातार नफरत फैलाने वाले (Hate Speech) और गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं, जो संविधान की भावना के खिलाफ है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के बयान और प्रतीकात्मक वीडियो न केवल सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर मुस्लिम समुदाय (Muslim Community), के खिलाफ नफरत को भी बढ़ावा देते हैं।
PIL में क्या है आरोप?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल इस जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, कुछ वरिष्ठ मंत्री (Senior Ministers) और राज्यपाल (Governors) समय-समय पर ऐसे बयान देते रहे हैं, जो एक विशेष समुदाय को निशाना बनाते हैं। याचिका में कहा गया है कि जब देश के उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोग इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो इसका समाज पर गंभीर और दूरगामी प्रभाव (Serious Social Impact) पड़ता है।
याचिकाकर्ताओं ने इसे संविधान के मूल्यों (Constitutional Values) और धर्मनिरपेक्षता (Secularism) के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया है।
ओवैसी ने हैदराबाद में दर्ज कराई शिकायत
इस मामले में AIMIM अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने हैदराबाद के एक पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत (Police Complaint) दर्ज कराई है। ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर पोस्ट करते हुए कहा कि आज के समय में नफरत और नरसंहार जैसी बातें दुर्भाग्यवश सामान्य होती जा रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के वीडियो और बयान समाज को बांटने का काम करते हैं और इनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई (Legal Action) होनी चाहिए।
12 लोगों ने मिलकर दाखिल की जनहित याचिका
इस जनहित याचिका को दाखिल करने वालों में पूर्व उप-राज्यपाल नजीब जंग (Najeeb Jung), सामाजिक कार्यकर्ता रेखा वर्मा (Rekha Verma), जॉन दयाल (John Dayal) सहित कुल 12 लोग शामिल हैं। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि वह इस गंभीर मुद्दे पर हस्तक्षेप करे और नफरत फैलाने वाले बयानों पर सख्त दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी करे।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री, मंत्री और राज्यपाल जैसे पदों पर बैठे लोगों से संवैधानिक मर्यादा (Constitutional Responsibility) की अपेक्षा की जाती है, लेकिन बार-बार ऐसे बयान सामने आना चिंताजनक है।
विवादित वीडियो में क्या था?
विवाद की जड़ बना यह वीडियो असम भाजपा (Assam BJP) के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया था। वीडियो में कथित तौर पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा एक राइफल से निशाना साधते हुए नजर आ रहे थे। वीडियो में दो व्यक्तियों की ओर गोली चलाने का दृश्य दिखाया गया, जिनमें से एक ने टोपी पहनी हुई थी और दूसरे ने दाढ़ी रखी हुई थी।
वीडियो के साथ लिखा गया कैप्शन था – “Point-Blank Shot”। इस कैप्शन और दृश्य को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया (Public Reaction) देखने को मिली। कई लोगों ने इसे आपत्तिजनक और सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने वाला बताया।
वीडियो हटाया गया, लेकिन विवाद बढ़ता गया
विवाद बढ़ने के बाद असम भाजपा ने यह वीडियो सोशल मीडिया से डिलीट (Delete) कर दिया। हालांकि, तब तक वीडियो कई प्लेटफॉर्म पर वायरल हो चुका था और स्क्रीनशॉट्स (Screenshots) के जरिए लोगों तक पहुंच गया था।
आलोचकों का कहना है कि वीडियो हटाने से जिम्मेदारी खत्म नहीं होती, बल्कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच (Independent Inquiry) होनी चाहिए।
संवैधानिक पदों की जिम्मेदारी पर सवाल
कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक समस्या की ओर इशारा करता है, जहां सत्ता में बैठे लोग अपने शब्दों और प्रतीकों के प्रभाव को नजरअंदाज कर देते हैं।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह भी आग्रह किया गया है कि वह यह तय करे कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए सार्वजनिक बयानबाजी (Public Statements) को लेकर क्या सीमाएं होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट से क्या उम्मीद?
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Hearing) पर टिकी है। उम्मीद की जा रही है कि अदालत इस मामले में न सिर्फ याचिका पर सुनवाई करेगी, बल्कि भविष्य में नफरत फैलाने वाले बयानों पर रोक लगाने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी कर सकती है।
यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) और संवैधानिक जिम्मेदारी (Constitutional Accountability) के बीच संतुलन को लेकर एक अहम मिसाल बन सकता है।
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