नई दिल्ली: भारत के प्रशासनिक इतिहास में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) अब अपनी दशकों पुरानी पहचान, ‘साउथ ब्लॉक’ को छोड़कर नए परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट होने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (14 जनवरी, 2026) से अपने नए कार्यालय से कामकाज संभालेंगे।
क्या है इस बदलाव की खासियत?
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत यह एक बड़ा कदम है। इस स्थानांतरण का मुख्य उद्देश्य प्रशासन में बेहतर समन्वय और आधुनिक कार्यशैली को बढ़ावा देना है।
नया पता: प्रधानमंत्री कार्यालय अब वायु भवन के पास स्थित ‘कार्यकारी एन्क्लेव-1’ के ‘सेवा तीर्थ-1’ भवन से संचालित होगा।
अन्य विभाग: इसी परिसर के ‘सेवा तीर्थ-2’ में कैबिनेट सचिवालय पहले ही शिफ्ट हो चुका है, जबकि ‘सेवा तीर्थ-3’ में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) का कार्यालय बनाया जाएगा।
ऐतिहासिक परिवर्तन: आजादी के बाद से ही PMO साउथ ब्लॉक में स्थित था। अब खाली होने के बाद साउथ और नॉर्थ ब्लॉक को “युगे युगीन भारत संग्रहालय” में बदल दिया जाएगा, जहाँ आम जनता भारत की प्रशासनिक और ऐतिहासिक यात्रा को देख सकेगी।
आधुनिक सुविधाओं से लैस ‘सेवा तीर्थ’
लगभग 1,189 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह परिसर 2,26,203 वर्ग फुट में फैला है। इसका निर्माण ‘लार्सन एंड टुब्रो’ (L&T) द्वारा किया गया है। इसकी डिजाइन ‘सेवा’ की थीम पर आधारित है, जो भारतीय मूल्यों और आधुनिक कार्यस्थल की जरूरतों का संगम है।
सरकार का मानना है कि यह बदलाव औपनिवेशिक विरासत (Colonial Legacy) को पीछे छोड़कर भारतीय मूल्यों के अनुरूप शासन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री के नए आधिकारिक आवास का निर्माण भी पास में ही चल रहा है।
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