पुणे : पुणे के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का मंगलवार, 6 जनवरी 2026 को 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे और पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। उनके निधन से महाराष्ट्र और देश की राजनीति सहित खेल जगत में भी शोक की लहर है।
सुरेश कलमाड़ी का राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन बेहद प्रभावशाली और उतार-चढ़ाव भरा रहा। यहाँ उनके जीवन और करियर से जुड़ी प्रमुख जानकारियां दी गई हैं:
शुरुआती जीवन और वायुसेना करियर
सुरेश कलमाड़ी का जन्म 1 मई 1944 को हुआ था। राजनीति में आने से पहले वे भारतीय वायुसेना में एक पायलट थे। उन्होंने 1964 से 1972 तक वायुसेना में अपनी सेवाएं दीं और 1965 व 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी हिस्सा लिया। वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने पुणे को अपनी कर्मभूमि बनाया।
राजनीतिक सफर: पुणे के ‘किंगमेकर’
कलमाड़ी ने पुणे की राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। वे कई बार पुणे से सांसद चुने गए।
- संसदीय कार्यकाल: वे तीन बार राज्यसभा सदस्य और तीन बार लोकसभा सदस्य (1996, 2004, 2009) रहे।
- मंत्री पद: पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार में वे केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रहे। उनके बारे में कहा जाता है कि वे एकमात्र ऐसे राज्य मंत्री थे जिन्होंने संसद में रेल बजट पेश किया था।
- पुणे का विकास: उन्हें पुणे के आधुनिकीकरण और खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने का श्रेय दिया जाता है। ‘पुणे फेस्टिवल’ की शुरुआत उन्हीं की देन थी, जिसने शहर को सांस्कृतिक मानचित्र पर मजबूती से उभारा।
खेल प्रशासन और कॉमनवेल्थ गेम्स
कलमाड़ी लंबे समय तक भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष रहे। उन्होंने भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेलों को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाई। हालांकि, 2010 में दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) उनके जीवन का सबसे विवादित मोड़ साबित हुआ। इन खेलों के आयोजन में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा और कांग्रेस पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था। हालांकि, बाद के वर्षों में उन्हें कुछ मामलों में कानूनी राहत भी मिली थी।
अंतिम समय और राजकीय सम्मान
पिछले कुछ वर्षों से वे सक्रिय राजनीति से पूरी तरह दूर थे और खराब स्वास्थ्य के कारण घर पर ही रहते थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी, एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। उनके कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए पुणे स्थित उनके निवास ‘कलमाड़ी हाउस’ में रखा गया, जिसके बाद पुणे के वैकुंठ श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
सुरेश कलमाड़ी का निधन भारतीय राजनीति के उस युग का अंत है जहाँ एक नेता ने खेल, सेना और राजनीति—तीनों क्षेत्रों में अपनी गहरी छाप छोड़ी।
