भारत की टैक्स व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। 1 अप्रैल से नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 प्रभावी हो जाएगा, जो 1961 के पुराने कानून की जगह लेगा। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य टैक्स प्रणाली को सरल, पारदर्शी और विवाद मुक्त बनाना है।
यहाँ नए कानून से जुड़े प्रमुख बदलाव और विशेषताएं दी गई हैं:
ऐतिहासिक बदलाव: यह नया कानून लगभग 64 साल पुराने ‘इनकम टैक्स एक्ट 1961’ को पूरी तरह खत्म कर देगा।
सरल और छोटा: नया कानून पुराने कानून की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत छोटा होगा और इसकी भाषा को काफी आसान बनाया गया है।
असेसमेंट ईयर का झंझट खत्म: अब ‘असेसमेंट ईयर’ और ‘प्रीवियस ईयर’ जैसे उलझाऊ शब्दों की जगह केवल एक ही शब्द— टैक्स ईयर का इस्तेमाल होगा।
रिफंड में राहत: यदि कोई टैक्सपेयर तय समय के बाद भी आईटीआर (ITR) फाइल करता है, तो उसे बिना किसी अतिरिक्त पेनल्टी के टीडीएस (TDS) रिफंड मिल सकेगा।
टैक्स दरें यथावत: सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कानून राजस्व के लिहाज से न्यूट्रल है, जिसका मतलब है कि टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
संसदीय मंजूरी: इस नए कानून को 12 अगस्त 2025 को संसद से और 21 अगस्त 2025 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है।
बजट 2026-27 का प्रभाव: आगामी बजट में घोषित होने वाले सभी टैक्स बदलाव इसी नए एक्ट का हिस्सा होंगे।
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