भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) में कृषि क्षेत्र का योगदान हमेशा से ही महत्वपूर्ण रहा है। किसान न केवल हमारे अन्नदाता हैं, बल्कि वे ग्रामीण उपभोग (Rural Consumption) के सबसे बड़े स्रोत भी हैं। हालांकि, जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और बढ़ती इनपुट लागत (Input Cost) के कारण खेती अब पहले जितनी लाभदायक नहीं रह गई है।
आगामी केंद्रीय बजट 2026 (Union Budget 2026) से देश के करोड़ों किसानों को बड़ी उम्मीदें हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब 1 फरवरी को अपना बजट पेश करेंगी, तो सबकी नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या सरकार कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कोई क्रांतिकारी कदम उठाएगी।
1. पीएम किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): क्या बढ़ेगी 6,000 की राशि?
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत फिलहाल पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये मिलते हैं, जो 2,000 रुपये की तीन किस्तों (Installments) में दिए जाते हैं।
बढ़ोतरी की मांग (Demand for Hike): विशेषज्ञों और किसान संगठनों का तर्क है कि 2019 में शुरू हुई इस राशि की वैल्यू महंगाई (Inflation) के कारण कम हो गई है। डीजल, खाद और बीज की कीमतों में भारी उछाल आया है।
संभावित बदलाव: कयास लगाए जा रहे हैं कि इस राशि को बढ़ाकर 8,000 से 10,000 रुपये किया जा सकता है। आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) के अनुसार, अब तक 11 करोड़ किसानों को 4.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक दिए जा चुके हैं।
2. खेती की लागत में कमी: GST और इनपुट सब्सिडी
किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती लागत है। कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई वस्तुओं पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) की दरें काफी अधिक हैं:
कीटनाशकों पर टैक्स (Tax on Pesticides): वर्तमान में कीटनाशकों पर 18% GST लगता है। मांग की जा रही है कि इसे घटाकर 5% किया जाए ताकि किसानों का खर्च कम हो सके।
कृषि यंत्र (Farm Machinery): ट्रैक्टर, सिंचाई के पंप और अन्य आधुनिक यंत्रों पर भी टैक्स राहत की उम्मीद है।
खाद और बीज (Fertilizers & Seeds): यूरिया और डीएपी (DAP) की समय पर उपलब्धता और सब्सिडी (Subsidy) का सही आवंटन बजट का मुख्य केंद्र हो सकता है।
3. एमएसपी (MSP) को कानूनी गारंटी और फसल सुरक्षा
न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price – MSP) को कानूनी दर्जा देना किसानों की पुरानी और प्रमुख मांग रही है।
कानूनी दर्जा (Legal Status): किसानों का मानना है कि केवल MSP घोषित करना काफी नहीं है, बल्कि इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाया जाना चाहिए ताकि कोई भी निजी खरीदार MSP से कम पर फसल न खरीद सके।
फसल बीमा (Crop Insurance): ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ (PMFBY) के सरलीकरण और दावों के त्वरित निपटान (Quick Settlement) के लिए अतिरिक्त फंड की उम्मीद है।
4. एग्री-इंफ्रास्ट्रक्चर और कोल्ड चेन (Agri-Infrastructure & Cold Chain)
फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान (Post-Harvest Losses) को रोकने के लिए सरकार बुनियादी ढांचे पर ध्यान दे सकती है:
कोल्ड स्टोरेज (Cold Storage): फल और सब्जियों जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों के लिए कोल्ड-चेन नेटवर्क का विस्तार।
लॉजिस्टिक्स (Logistics): ‘कृषि उड़ान’ और ‘किसान रेल’ जैसी योजनाओं को अधिक बजट आवंटित कर निर्यात (Export) को बढ़ावा देना।
5. डिजिटल एग्रीकल्चर और तकनीक (Digital Agriculture & Tech)
‘विकसित भारत 2047’ के विजन को पूरा करने के लिए खेती में तकनीक का समावेश जरूरी है:
एग्री-स्टार्टअप्स (Agri-Startups): ड्रोन तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करने वाले स्टार्टअप्स को टैक्स छूट (Tax Incentives) मिल सकती है।
मृदा स्वास्थ्य (Soil Health): मिट्टी की नमी और पोषक तत्वों की जांच के लिए डिजिटल टूल्स को बढ़ावा।
विकसित भारत की ओर एक कदम
बजट 2026 केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि भारतीय कृषि की दशा और दिशा बदलने का एक अवसर है। यदि सरकार पीएम-किसान की राशि बढ़ाती है और इनपुट लागत में कमी लाती है, तो यह न केवल किसानों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) बढ़ाएगा बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी जान फूंक देगा।
मजबूत खेती ही ‘विकसित भारत’ की नींव है। अब देखना यह है कि 1 फरवरी को वित्त मंत्री के पिटारे से किसानों के लिए कितनी खुशियां निकलती हैं।
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