चेन्नई, 2 जनवरी, 2026 – India’s right to protect itself from bad neighbors विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शुक्रवार को पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसे सख्त चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत अपने आत्मरक्षा के अधिकार का पूर्ण इस्तेमाल करेगा और भारत अपनी सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाता है, यह तय करने का हक किसी और देश को नहीं है। चेन्नई स्थित आईआईटी मद्रास में ‘शस्त्र 2026 – टेक्नो-एंटरटेनमेंट फेस्ट’ के उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर खुलकर बात की।
सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं
डॉ. जयशंकर ने कहा कि देश की अखंडता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जो भी आवश्यक होगा, वह किया जाएगा। विदेश नीति से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “पड़ोसी चुनना हमारे हाथ में नहीं होता, वे बुरे भी हो सकते हैं। पश्चिम की ओर देखने पर हमें पता चलता है कि हमारे साथ भी दुर्भाग्य से यही स्थिति है। अगर कोई देश जानबूझकर और लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो हमारे पास आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है।” उन्होंने आगे कहा कि भारत अपनी रक्षा के लिए कब और कैसे कदम उठाएगा, यह पूरी तरह भारत का फैसला होगा।
जल समझौता और आतंकवाद:
दोहरी नीति नहीं चलेगी विदेश मंत्री ने जल बंटवारा समझौतों का जिक्र करते हुए पड़ोसी देश के दोहरे रवैये पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “दशकों तक आतंकवाद फैलाना अच्छे पड़ोसी की निशानी नहीं है। यदि आप अच्छे पड़ोसी नहीं हैं, तो आपको अच्छे पड़ोसी होने के लाभ भी नहीं मिलेंगे। आप यह नहीं कह सकते कि आप आतंकवाद भी जारी रखेंगे और साथ में जल साझा करने की उम्मीद भी करेंगे। यह संभव नहीं है।”
पड़ोसी देशों की मदद और क्षेत्रीय विकास भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति पर चर्चा करते हुए डॉ. जयशंकर ने बांग्लादेश, श्रीलंका और अन्य देशों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि भारत अपने अच्छे पड़ोसियों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहता है।
श्रीलंका: आर्थिक संकट के दौरान भारत ने उसे 4 अरब डॉलर की सहायता प्रदान की।
कोरोना काल: भारत ने संकट के समय सबसे पहले अपने पड़ोसियों को वैक्सीन उपलब्ध कराई।
विकास में साझेदारी: उन्होंने जोर देकर कहा कि अधिकतर पड़ोसी देश यह मानते हैं कि भारत का आर्थिक विकास उनके लिए भी प्रगति के द्वार खोलेगा। यही दृष्टिकोण भारत बांग्लादेश के प्रति भी रखता है।
अंत में उन्होंने दोहराया कि भारत का विकास पूरे क्षेत्र की तरक्की के लिए जरूरी है और इसके लिए भारत अपने सहयोगियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार है।
