भारत के पब्लिशिंग जगत (Publishing World) में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है— पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (Penguin Random House India)। पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (Four Stars of Destiny) को लेकर मचे सियासी घमासान ने इस दिग्गज पब्लिशिंग हाउस को सुर्खियों में ला दिया है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस कंपनी की किताबों को हम और आप पढ़ते हैं, वह असल में भारतीय है या विदेशी? क्या यह सिर्फ अंग्रेजी किताबें छापती है या क्षेत्रीय भाषाओं (Regional Languages) में भी इसका दखल है? आइए जानते हैं इस पब्लिशिंग दिग्गज की पूरी ‘Inside Story’।
किताब पर विवाद: क्या है पूरा मामला? (The Controversy)
विवाद की शुरुआत तब हुई जब लोकसभा (Lok Sabha) में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ की एक कॉपी दिखाई और उसके कुछ अंशों का जिक्र किया। सरकार ने तुरंत इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह किताब अभी आधिकारिक तौर पर प्रकाशित (Published) ही नहीं हुई है।
इस पर Penguin Random House India (PRHI) ने एक आधिकारिक बयान (Official Statement) जारी कर स्पष्ट किया:
किताब के प्रकाशन अधिकार (Publishing Rights) केवल कंपनी के पास हैं।
अभी तक किताब की कोई भी आधिकारिक कॉपी (Authorized Copy) बाजार या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं है।
बिना अनुमति के किताब के अंश साझा करना कॉपीराइट का उल्लंघन (Copyright Infringement) है और कंपनी इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
पेंगुइन रैंडम हाउस: भारतीय या विदेशी? (Indian or Foreign?)
अक्सर लोग पेंगुइन को एक भारतीय कंपनी समझने की गलती कर बैठते हैं क्योंकि भारत में इसका बहुत बड़ा नेटवर्क है। लेकिन हकीकत कुछ और है:
ग्लोबल इकाई (Global Entity): यह असल में वैश्विक प्रकाशन समूह Penguin Random House (PRH) की भारतीय सहायक कंपनी (Subsidiary) है।
विलय का इतिहास (Merger History): साल 2013 में दुनिया के दो बड़े प्रकाशकों ‘पेंगुइन’ और ‘रैंडम हाउस’ का विलय हुआ, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा पब्लिशिंग ग्रुप बन गया।
असली मालिक (Ownership): जर्मनी (Germany) की मीडिया दिग्गज कंपनी बर्टेल्समैन (Bertelsmann) साल 2020 में पेंगुइन रैंडम हाउस की शत-प्रतिशत मालिक बन गई।
निष्कर्ष: तकनीकी रूप से यह एक विदेशी कंपनी (Foreign Company) है, जिसका मुख्यालय (Headquarters) न्यूयॉर्क में है, लेकिन भारत में इसका संचालन एक स्वतंत्र भारतीय इकाई के तौर पर होता है।
कितनी है पेंगुइन की कमाई? (Financial Performance)
पेंगुइन रैंडम हाउस का बिजनेस ग्राफ काफी प्रभावशाली है। ‘द बुकसेलर’ और ‘क्रिसिल रेटिंग’ (CRISIL Ratings) के आंकड़ों के अनुसार:
| विवरण (Description) | वित्त वर्ष 2023 (FY23) | वित्त वर्ष 2024 (FY24) |
| ऑपरेटिंग इनकम (Operating Income) | ₹343.46 करोड़ | ₹404.60 करोड़ |
| नेट प्रॉफिट (Net Profit) | ₹24.18 करोड़ | ₹8.95 करोड़ |
| ग्लोबल रेवेन्यू (Global Revenue) | – | ₹52,430 करोड़ (€4.9 Billion) |
खास बात: कंपनी पर कोई बाहरी कर्ज (External Debt) नहीं है और सितंबर 2024 तक इसके पास करीब ₹9.74 करोड़ का फ्री कैश (Free Cash) मौजूद था। हालांकि, मुनाफे (Profit) में गिरावट दर्ज की गई है, जिसका कारण बढ़ती लागत और डिजिटल बदलाव हो सकते हैं।
भारत में कारोबार का विस्तार (Business in India)
पेंगुइन इंडिया (Penguin India) केवल अंग्रेजी तक सीमित नहीं है। भारत में इसकी पकड़ बहुत गहरी है:
हर साल 300 किताबें: कंपनी हर साल लगभग 300 नई किताबें (New Titles) बाजार में उतारती है।
बैकलिस्ट पोर्टफोलियो: इसके पास 3,000 से ज्यादा पुरानी और सदाबहार किताबों का संग्रह है।
क्षेत्रीय भाषाएँ (Regional Languages): कंपनी स्थानीय प्रकाशकों के साथ मिलकर हिंदी, मराठी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, बंगाली, गुजराती और कन्नड़ में भी किताबें प्रकाशित करती है।
दिग्गज लेखक: अरुंधति रॉय, सुधा मूर्ति, अमिताभ घोष और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान लेखकों की रचनाएं इसी बैनर तले प्रकाशित हुई हैं।
भविष्य की राह (Future Outlook)
अनुमान है कि साल 2025-26 तक कंपनी का औसत कारोबार ₹120-140 करोड़ के बीच स्थिर रह सकता है। डिजिटल बुक्स (E-books) और ऑडियोबुक्स (Audiobooks) के बढ़ते चलन के बीच पेंगुइन अपने आप को तेजी से बदल रहा है। जनरल नरवणे की किताब जैसे विवाद कंपनी के लिए ‘पब्लिसिटी’ और ‘चुनौती’ दोनों लेकर आते हैं।
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