बिहार के जमुई जिले में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात एक अत्यंत भीषण रेल दुर्घटना हुई, जिसने पूर्व रेलवे के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक, आसनसोल रेल मंडल के जसीडीह-झाझा रेल खंड को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। यह हादसा इतना भयानक था कि सीमेंट से लदी मालगाड़ी के कई डिब्बे न केवल पटरी से उतरे, बल्कि पुल तोड़कर नदी में जा गिरे।
बिहार में भीषण रेल दुर्घटना: सीमेंट लदी मालगाड़ी का तांडव, 17 डिब्बे बेपटरी
हादसे का घटनाक्रम: यह घटना शनिवार रात करीब 12:00 बजे की है। जानकारी के अनुसार, एक मालगाड़ी जो भारी मात्रा में सीमेंट की बोरियों से लदी हुई थी, जसीडीह की ओर से झाझा की तरफ (अप ट्रैक पर) जा रही थी। जैसे ही यह ट्रेन जमुई जिले के टेलवा बाजार हॉल्ट के समीप स्थित बधुआ नदी पर बने पुल संख्या 676 पर पहुंची, अचानक एक जोरदार धमाके जैसी आवाज के साथ ट्रेन का संतुलन बिगड़ गया। देखते ही देखते मालगाड़ी के डिब्बे ताश के पत्तों की तरह एक-दूसरे पर चढ़ने लगे और पटरी से उतरने लगे।
नदी में गिरे डिब्बे और पुल पर तबाही: दुर्घटना की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मालगाड़ी के तीन डिब्बे पुल की रैलिंग तोड़कर सीधे बधुआ नदी के गहरे पानी में जा गिरे। इसके अलावा, दो डिब्बे पुल के ऊपर ही इंजन से कटकर अलग हो गए और खतरनाक तरीके से लटक गए। कुल मिलाकर मालगाड़ी की 17 बोगियां पटरी से उतर गईं। इनमें से लगभग एक दर्जन डिब्बे एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए, जिससे रेल की पटरियां पूरी तरह से उखड़ गईं और मालगाड़ी का मलबा अप ट्रैक के साथ-साथ बगल वाले डाउन ट्रैक पर भी फैल गया।
आधी रात को मची अफरा-तफरी: घने अंधेरे और कड़ाके की ठंड के बीच जब यह हादसा हुआ, तो आसपास के ग्रामीणों में दहशत फैल गई। ट्रेन के बेपटरी होने की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। चूंकि यह मालगाड़ी थी, इसलिए किसी जनहानि की खबर नहीं है, लेकिन अगर यह कोई यात्री ट्रेन होती, तो परिणाम अत्यंत दुखद हो सकते थे। रेलमार्ग के दोनों ट्रैक (अप और डाउन) मलबे से पट जाने के कारण हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेल मार्ग पर ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह से ठप हो गया।
रेलवे प्रशासन की त्वरित कार्रवाई: हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे महकमे में हड़कंप मच गया। आसनसोल डिवीजन के पीआरओ बिपला बोरी ने दुर्घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सूचना मिलते ही विशेष राहत टीमों को रवाना किया गया। झाझा स्टेशन प्रबंधक अखिलेश कुमार, आरपीएफ ओपी प्रभारी रवि कुमार और पीडब्लूआई रंधीर कुमार अपनी टीमों के साथ आधी रात को ही मौके पर पहुंचे। हालांकि, रात के अंधेरे और मलबे की अधिकता के कारण शुरुआती घंटों में क्षति का सही आकलन करना मुश्किल हो रहा था।
यातायात और परिचालन पर भारी असर: इस हादसे ने दिल्ली-हौवड़ा रूट की कमर तोड़ दी है। जसीडीह और झाझा स्टेशनों के बीच ट्रेनों की आवाजाही बंद होने के कारण दर्जनों एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों को बीच के स्टेशनों पर ही रोकना पड़ा। कड़ाके की ठंड में यात्री स्टेशनों पर फंसे हुए हैं। कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के रूट बदले गए हैं, जबकि कुछ को रद्द करना पड़ा है। रेलवे के इंजीनियरों का कहना है कि पटरी और बिजली के तारों (OHE) को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसे ठीक करने में लंबा समय लग सकता है।
जांच के घेरे में हादसा: फिलहाल इस बड़े हादसे की असली वजह सामने नहीं आई है। रेलवे यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या यह हादसा पटरियों में दरार (Track Fracture) की वजह से हुआ, या ट्रेन की ओवरलोडिंग या पहियों में आई किसी तकनीकी खराबी के कारण। उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
राहत कार्य जारी: रविवार सुबह होते ही घटनास्थल पर युद्ध स्तर पर राहत कार्य शुरू कर दिया गया है। बड़ी-बड़ी क्रेन और भारी मशीनों की मदद से नदी में गिरे और पटरी पर बिखरे डिब्बों को हटाने का काम किया जा रहा है। सीमेंट की हजारों बोरियां ट्रैक पर बिखरी पड़ी हैं, जिन्हें हटाने के लिए बड़ी संख्या में मजदूरों को लगाया गया है। रेलवे अधिकारियों का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द कम से कम एक ट्रैक को चालू किया जाए ताकि यातायात बहाल हो सके।
