9 दिसंबर 2025 : Grahan 2026: नया साल 2026 शुरू होने में अब कुछ ही दिन बाकी हैं और हर कोई जानना चाहता है कि आने वाला वर्ष कैसा रहेगा। लोग यह भी जानना चाहते हैं कि नए साल के आने वाले महीनों में कौन सी बड़ी खगोलीय घटनाएं होंगी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2026 में सूर्य और चंद्र ग्रहण कब होंगे, वे किन देशों में दिखाई देंगे, और क्या उनका सूतक काल भारत में भी लगेगा। तो आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में ग्रहण की कौन-कौन सी तारीखें होंगी।
2026 में ग्रहण की तिथियां
वर्ष 2026 में कुल चार ग्रहण लगेंगे— दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण।
1. वर्ष 2026 का पहला सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2026 February)
तिथि: 17 फरवरी 2026, मंगलवार
प्रकार: यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसका अर्थ है कि आकाश में सूर्य के चारों ओर एक आग की तरह चमकदार रिंग दिखाई देगी, जिसे रिंग ऑफ फायर (Ring of Fire) कहा जाता है।
दृश्यता: यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह मुख्य रूप से दक्षिण अफ्रीका, दक्षिणी अर्जेंटीना और अंटार्कटिका में दिखाई देगा।
सूतक काल: चूँकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा। यह संयोग से अमावस्या के दिन लगेगा।
2. वर्ष 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2026 August)
तिथि: 12 अगस्त 2026, बुधवार
प्रकार: यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, यानी सूर्य कुछ समय के लिए पूरी तरह से ढंक जाएगा।
दृश्यता: यह ग्रहण आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और पुर्तगाल के कई हिस्सों में दिखाई देगा।
भारत में स्थिति: यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, क्योंकि उस समय यहां रात होगी। इसलिए, सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।
3. वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण
तिथि: 3 मार्च 2026, मंगलवार
प्रकार: यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जिसका मतलब है कि चंद्रमा का एक हिस्सा काला दिखाई देगा।
समय: यह ग्रहण शाम 6:26 बजे से 6:46 बजे तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि 20 मिनट की होगी।
दृश्यता: यह ग्रहण भारत सहित कई एशियाई देशों में दिखाई देगा। इसके अलावा, यह ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में भी दिखाई देगा।
सूतक काल: चूँकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भारत में मान्य होगा। सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है।
विशेष: यह ग्रहण होली के दिन लगेगा।
4. वर्ष 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण
तिथि: 28 अगस्त 2026
प्रकार: यह भी एक चंद्र ग्रहण होगा।
दृश्यता: यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा।
सूतक काल: चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी भारत में मान्य नहीं होगा।
ग्रहण क्यों लगते हैं?
सूर्य ग्रहण क्यों लगता है?
सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। इससे चंद्रमा पृथ्वी पर अपनी छाया डालता है और सूर्य का प्रकाश ढंक जाता है। यह तभी होता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं, जो आमतौर पर अमावस्या के दौरान होता है।
चंद्र ग्रहण क्यों लगता है?
चंद्र ग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। इसके कारण पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। यह खगोलीय घटना केवल पूर्णिमा के दिन ही होती है, जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया से होकर गुजरता है।
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