ढाका/सुनामगंज, 10 जनवरी 2026: बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का जो सिलसिला शुरू हुआ था, वह नए साल में भी बदस्तूर जारी है। ताज़ा मामला सुनामगंज जिले का है, जहाँ एक हिंदू युवक की नृशंस हत्या ने मानवता को झकझोर कर रख दिया है।
जॉय महापात्र की हत्या: पहले पीटा, फिर पिलाया जहर
सुनामगंज जिले में जॉय महापात्र नामक हिंदू युवक की हत्या की खबर ने स्थानीय हिंदू समुदाय को दहला दिया है। मृतक के परिजनों का आरोप है कि एक स्थानीय प्रभावशाली व्यक्ति ने पहले जॉय को बेहद बेरहमी से पीटा और फिर उसे जबरन जहर पिला दिया।
जॉय को गंभीर हालत में सिलहट के एमएजी उस्मानी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। वहां कई घंटों तक आईसीयू (ICU) में जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद उसने अंतिम सांस ली। यह घटना दिखाती है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराध किस कदर बेलगाम हो चुके हैं।
हिंसा की कड़ियां: मिथुन सरकार और दीपू चंद्र दास की दास्तां
यह केवल एक इकलौती घटना नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं:
मिथुन सरकार की मौत: महज कुछ दिन पहले 25 वर्षीय मिथुन सरकार को चोरी के संदेह में भीड़ ने घेर लिया था। जान बचाने के लिए वह नहर में कूद गया, लेकिन तैरना न आने के कारण डूबने से उसकी मौत हो गई।
दीपू चंद्र दास का ‘लिंचिंग’ कांड: 18 दिसंबर को मयमनसिंह जिले में 27 वर्षीय दीपू चंद्र दास की हत्या ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था। उन पर ईशनिंदा (Blasphemy) का झूठा आरोप लगाया गया था। भीड़ ने उन्हें पहले पीटा और फिर उनके शव को पेड़ से लटकाकर आग के हवाले कर दिया। बाद में पुलिस जांच में सामने आया कि ईशनिंदा का आरोप पूरी तरह फर्जी और महज एक अफवाह थी।
दिसंबर महीने का ‘काला’ रिपोर्ट कार्ड
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (BHBCUC) के आंकड़ों ने देश की भयावह तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार:
कुल घटनाएं: अकेले दिसंबर 2025 में सांप्रदायिक हिंसा की 51 घटनाएं दर्ज की गईं।
हत्याएं: इस एक महीने में कम से कम 10 अल्पसंख्यकों की हत्या हुई है।
झूठे आरोप: 10 घटनाएं केवल ईशनिंदा के फर्जी आरोपों के कारण हुईं, जिनका इस्तेमाल भीड़ को उकसाने के लिए किया गया।
लूट और आगजनी: हिंदू घरों, मंदिरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।
सुरक्षा के साये में अल्पसंख्यक और भारत का रुख
शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से ही बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतें हावी नजर आ रही हैं। आगामी संसदीय चुनावों की तैयारियों के बीच अल्पसंख्यकों को सॉफ्ट टारगेट बनाया जा रहा है। भारत सरकार ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘तत्काल और सख्त कार्रवाई’ करनी चाहिए।
निष्कर्ष: बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह अब केवल एक घरेलू मुद्दा नहीं रह गया है। यह मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। ईशनिंदा के नाम पर भीड़ द्वारा न्याय (Mob Justice) करना वहां की कानून व्यवस्था की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
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