भोपाल: मध्य प्रदेश के कद्दावर भाजपा नेता और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने चुनावी वादों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण बयान दिया है। भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि चुनाव के समय किए गए वादों को पूरा करने में राज्यों को भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अब राज्यों की मदद के लिए केंद्र सरकार को आगे आना चाहिए।
राजनीतिक मजबूरी और बिगड़ती आर्थिक स्थिति
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि अक्सर राजनीतिक मजबूरियों के चलते चुनाव के दौरान कई बड़ी घोषणाएं और वादे कर दिए जाते हैं, लेकिन बाद में उन्हें अमलीजामा पहनाने से राज्य के बजट पर असहनीय बोझ पड़ता है। उन्होंने स्वीकार किया कि यही कारण है कि आज कई राज्यों की आर्थिक स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है।
“राज्यों का बजट गड़बड़ा गया है”
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा भोपाल में आयोजित शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक में विजयवर्गीय बोल रहे थे। उन्होंने सार्वजनिक मंच से कहा कि राज्य के बजट की स्थिति काफी खराब हो गई है और अब इसका प्रबंधन करना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि चुनाव के दौरान बजट को लेकर जो उम्मीदें जगाई जाती हैं, वे अक्सर वास्तविक संसाधनों से कहीं अधिक होती हैं। इसी वित्तीय दबाव के कारण अब राज्यों को मदद के लिए केंद्र सरकार की ओर देखना पड़ रहा है।
केंद्रीय योजनाओं में अधिक सहयोग की मांग
विजयवर्गीय ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि अमृत योजना, आवास योजना और अन्य केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत राज्यों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता बढ़ाई जाए। उन्होंने समझाया कि इन योजनाओं के तहत कुछ काम तो पूरे हो चुके हैं, लेकिन बाकी बचे हुए कार्यों को पूरा करने के लिए राज्यों के पास पर्याप्त संसाधनों का अभाव है।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह स्थिति केवल मध्य प्रदेश की नहीं है, बल्कि देश के लगभग हर राज्य की यही कहानी है। चुनावी वादों और प्रतिबद्धताओं ने राज्यों पर इतना वित्तीय दबाव डाल दिया है कि अब इन विकास योजनाओं को केवल केंद्र की अतिरिक्त मदद से ही आगे बढ़ाया जा सकता है।
