8 दिसंबर, 2025 : कांग्रेस द्वारा एक चौंकाने वाला दावा किया गया है, जिसने गुजरात की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस ने एक स्टिंग ऑपरेशन के माध्यम से इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश करते हुए कहा है कि अहमदाबाद शहर में चलने वाले अधिकांश रिक्शा चालकों से पुलिस के व्यवस्थापकों (वहीवटदार) द्वारा हर महीने प्रति रिक्शा ₹1000 का हफ्ता (मासिक वसूली) लिया जाता है। यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि इस वसूली के लिए पुलिस द्वारा रिक्शा चालकों को एक विशिष्ट स्टिकर देकर एक विशेष तरीके (मोडस ऑपरेंडी) से उगाही की जाती है।
मासिक ₹1000 हफ्ता, वार्षिक ₹180 करोड़ का घोटाला!
गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रवक्ता हेमांग रावल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर यह जानकारी दी। उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन के निष्कर्षों को प्रस्तुत करते हुए बताया कि रिक्शा चालकों से बातचीत में यह सामने आया कि पुलिस व्यवस्थापक हर महीने रिक्शा का ₹1000 हफ्ता लेते हैं।
कांग्रेस के दावे के अनुसार, अहमदाबाद शहर में कुल 3 लाख रिक्शा हैं, जिनमें से लगभग 1.5 लाख रिक्शा शटल रिक्शा (जिनकी अनुमति आरटीओ नियमों के अनुसार नहीं है) के रूप में चलाई जाती हैं।
“अगर 1.5 लाख शटल रिक्शा से वार्षिक ₹12000 (मासिक ₹1000 के हिसाब से) हफ्ता वसूला जाता है, तो अकेले अहमदाबाद में ही पुलिस व्यवस्थापकों के माध्यम से ₹180 करोड़ से अधिक के हफ्ते की अवैध वसूली होती है।”
कांग्रेस ने यह भी आशंका व्यक्त की है कि पूरे गुजरात में यह भ्रष्ट घोटाला ₹1000 करोड़ से अधिक का हो सकता है।
स्टिकर की कार्यप्रणाली (मोडस ऑपरेंडी): हफ्ता भरने का ‘प्रमाण’
इस वसूली के पीछे की विशिष्ट प्रणाली समझाते हुए कांग्रेस ने बताया:
हफ्ता देने वाले रिक्शा में एक विशिष्ट प्रकार का स्टिकर लगाया जाता है।
यह स्टिकर हफ्ता भरने का प्रमाण माना जाता है।
स्टिकर लगी रिक्शाओं को प्वाइंट्स पर पुलिस द्वारा रोका नहीं जाता है।
हर महीने इस स्टिकर का डिज़ाइन बदल दिया जाता है, और दिवाली जैसे त्योहारों पर खास दीया स्वरूप का स्टिकर लगाया जाता है।
कांग्रेस की मुख्य माँगें
इस पूरे घोटाले के मामले में कांग्रेस ने गुजरात सरकार और पुलिस प्रशासन से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है:
स्टिकर-आधारित हफ्ता वसूली के मुद्दे पर तत्काल और गंभीर जांच की जाए।
जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
गरीब रिक्शा चालकों को उनके जीवनयापन के लिए शेयरिंग पैसेंजर लेकर चलने की कानूनी छूट दी जाए।
कांग्रेस का कहना है कि यदि आरटीओ के नियम के अनुसार पैसेंजर बिठाने की छूट दी जाती है, तो हफ्ता वसूलने वाला यह अवैध नेटवर्क अपने आप टूट जाएगा। कांग्रेस ने यह भी स्वीकार किया कि अहमदाबाद के रिलीफ़ रोड, रतनपोल, गांधी रोड, कालूपुर, स्टेशन जैसे इलाकों में शेयरिंग रिक्शा के ज़रिए ही आम जनता का परिवहन संभव हो पाता है।
पुलिस का जवाब
जब अहमदाबाद पुलिस पर कांग्रेस के गंभीर आरोप के संबंध में संपर्क करने की कोशिश की गई, तो पुलिस अधिकारियों ने इस मामले पर कोई जवाब नहीं दिया।
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