न्यूयोर्क, 8 जनवरी, 2026 – US has withdrawn from 66 UN organizations अमेरिकी राष्ट्र प्रमुख डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को धार देते हुए एक ऐतिहासिक मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत अमेरिका ने उन 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों, समझौतों और संधियों से नाता तोड़ लिया है, जिन्हें ट्रंप प्रशासन देश के हितों के प्रतिकूल और संप्रभुता के लिए खतरा मानता है।
ट्रंप प्रशासन का ‘अमेरिका फर्स्ट’ मिशन व्हाइट हाउस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, अमेरिका कुल 66 वैश्विक संस्थाओं से बाहर निकल रहा है। इनमें 31 संगठन संयुक्त राष्ट्र (UN) से जुड़े हैं, जबकि 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठन हैं। राष्ट्र प्रमुख के प्रशासन ने इन संस्थाओं को ‘अमेरिका-विरोधी’, ‘अनुपयोगी’ और ‘करदाताओं के पैसे की फिजूलखर्ची’ करार दिया है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बाहरी दबावों से मुक्त करना और राष्ट्रीय संप्रभुता को सर्वोपरि रखना है।
भारत के ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ को छोड़ा इस फैसले का बड़ा असर भारत पर भी पड़ा है। अमेरिका ने भारत और फ्रांस की पहल पर बने ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ (ISA) से बाहर निकलने का ऐलान कर दिया है। इसके अलावा पर्यावरण से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण संगठनों जैसे ‘इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर’ (IUCN) और ‘इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज’ (IPCC) को भी अमेरिका ने अलविदा कह दिया है।
विदेश मंत्री मार्को रूबियो की कड़ी प्रतिक्रिया
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि राष्ट्र प्रमुख ट्रंप ने उन संगठनों को छोड़ने का वादा पूरा किया है जो केवल अमेरिका का पैसा बर्बाद करते हैं या उसके खिलाफ काम करते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “अब हम उन ‘ग्लोबलिस्ट नौकरशाहों’ को फंड देना बंद करेंगे जो अमेरिकी हितों के खिलाफ एजेंडा चलाते हैं।” रूबियो ने यह भी संकेत दिया कि कुछ अन्य संगठनों की कार्यप्रणाली की समीक्षा अभी जारी है।
किन प्रमुख यूएन संस्थाओं पर गिरी गाज? संयुक्त राष्ट्र की जिन प्रमुख इकाइयों से अमेरिका ने हटने का फैसला किया है, उनमें प्रमुख हैं:
डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक एंड सोशल अफेयर्स (DESA)
इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर (ITC)
यूएन पॉपुलेशन फंड (UNFPA)
यूएन वॉटर और यूएन एनर्जी
इंटरनेशनल लॉ कमीशन और पीसबिल्डिंग कमीशन
प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के निर्देश जारी किए गए मेमोरेंडम में सभी अमेरिकी विभागों और एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे इन संगठनों से बाहर निकलने की कानूनी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से शुरू करें। इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिका अब इन संस्थाओं की बैठकों में भाग लेना और उन्हें दी जाने वाली वित्तीय सहायता (फंडिंग) को पूरी तरह बंद कर देगा। राष्ट्र प्रमुख के प्रशासन का मानना है कि इन मंचों पर बने रहना राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए घाटे का सौदा था।
