सोमनाथ, 8 जनवरी, 2026 – The ‘Somnath Swabhiman Parv’ सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान होने वाले भव्य ड्रोन शो और कार्यक्रमों में मंदिर के उन ऐतिहासिक पड़ावों को दर्शाया जाएगा, जो भारत की अटूट जिजीविषा (Survival) के प्रतीक हैं। यहाँ सोमनाथ से जुड़े कुछ प्रमुख ऐतिहासिक तथ्य दिए गए हैं.
विनाश और पुनरुद्धार का चक्र सोमनाथ मंदिर को इतिहास में कई बार नष्ट करने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार यह पहले से अधिक भव्यता के साथ खड़ा हुआ।
1026 का आक्रमण: महमूद गजनवी ने इस मंदिर की अकूत संपत्ति को लूटने और भारत के आध्यात्मिक मनोबल को तोड़ने के लिए हमला किया था। इस घटना के अब 1000 साल पूरे हो रहे हैं। इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी (1299) और अंत में औरंगजेब (1706) ने भी मंदिर को भारी नुकसान पहुँचाया।
स्वाभिमान पर्व में क्या होगा?
हमीरजी गोहिल और वेगाड़ा भील का बलिदान ड्रोन शो में उन वीरों की गाथा भी दिखाई जाएगी जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। लाठी के राजकुमार हमीरजी गोहिल ने गजनवी की विशाल सेना के सामने मुट्ठी भर सैनिकों के साथ मोर्चा लिया था। उनकी बहादुरी का सम्मान करते हुए आज भी मंदिर के प्रवेश द्वार के पास उनकी प्रतिमा स्थापित है।
अहिल्याबाई होल्कर का योगदान जब मुख्य मंदिर खंडहर अवस्था में था, तब इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने 1783 में मंदिर के पास ही एक नए मंदिर का निर्माण करवाया था ताकि पूजा-अर्चना अनवरत चलती रहे। सांस्कृतिक पुनरुत्थान में उनके योगदान को भी इस पर्व में याद किया जाएगा।
आधुनिक भारत का संकल्प (सरदार पटेल का विजन) आजादी के तुरंत बाद, नवंबर 1947 में जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ का दौरा किया, तो उन्होंने समुद्र का जल हाथ में लेकर संकल्प लिया था कि वे इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराएंगे। इस कार्य में कन्हैयालाल मुंशी (K.M. Munshi) ने उनका पूरा साथ दिया। 11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने नवनिर्मित मंदिर में ज्योतिर्लिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की थी।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्त्व
ज्योतिर्लिंग की विशिष्टता सोमनाथ को भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है। ऋग्वेद और स्कंद पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसका उल्लेख ‘प्रभास क्षेत्र’ के रूप में मिलता है। माना जाता है कि यहाँ भगवान चंद्र (चंद्रमा) ने श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की तपस्या की थी।
बाण स्तंभ (Arrow Pillar) सोमनाथ मंदिर के प्रांगण में स्थित ‘बाण स्तंभ’ प्राचीन भारतीय भूगोल और विज्ञान का अद्भुत प्रमाण है। इस स्तंभ पर लिखा है कि यदि यहाँ से दक्षिण ध्रुव (South Pole) की ओर एक सीधी रेखा खींची जाए, तो बीच में कोई भी भूखंड (जमीन का टुकड़ा) नहीं आता। यह दिखाता है कि हमारे पूर्वजों को समुद्री भूगोल का कितना गहरा ज्ञान था।
