छोटा उदयपुर: गुजरात के पंचायती राज (Panchayati Raj) इतिहास में एक ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई दंग है। एक व्यक्ति जनता द्वारा भारी मतों से सरपंच पद (Post of Sarpanch) पर चुना तो गया, लेकिन उसे 6 महीने बीत जाने के बाद भी चार्ज (Charge) नहीं सौंपा गया। कानूनी पेचीदगियों (Legal Complications) में फंसे इस मामले का अंत इतना नाटकीय रहा कि अंततः वहां एक प्रशासक (Administrator/Vahivatdar) की नियुक्ति करनी पड़ी।
यह मामला संखेड़ा तालुका के इंद्राल ग्राम पंचायत (Indral Gram Panchayat) का है, जहां राकेश भाई रतिलाल पंचाल 6 महीने से ‘निर्वाचित सरपंच’ तो हैं, लेकिन उनके पास गांव का विकास करने की कोई शक्ति (Power) नहीं थी।
आखिर कहाँ फंसा था कानूनी पेंच? (Where was the Legal Glitch?)
छोटा उदयपुर जिले में जब ग्राम पंचायतों के चुनाव आयोजित किए गए, तब इंद्राल ग्राम पंचायत में एक अभूतपूर्व स्थिति (Unprecedented Situation) पैदा हो गई। इस पंचायत में कुल 8 वार्ड हैं, लेकिन समय सीमा (Deadline) के भीतर किसी भी उम्मीदवार ने वार्ड सदस्य (Ward Member/Panch) के पद के लिए नामांकन (Nomination) दाखिल नहीं किया।
एकमात्र चुनाव: केवल सरपंच पद के लिए ही चुनाव हुए, जिसमें राकेश भाई रतिलाल पंचाल 25 जून को विजेता (Winner) घोषित किए गए।
कोरम का अभाव (Lack of Quorum): पंचायती राज नियमों के अनुसार, चुनाव के बाद पंचायत की ‘पहली बैठक’ (First Meeting) बुलाना अनिवार्य है। इस बैठक में उप-सरपंच (Deputy Sarpanch) का चुनाव किया जाता है।
तकनीकी समस्या: पहली बैठक बुलाने के लिए ‘कोरम’ यानी सदस्यों की न्यूनतम उपस्थिति (Minimum Presence) जरूरी है। चूंकि इंद्राल में एक भी सदस्य नहीं चुना गया था, इसलिए तकनीकी रूप से पहली बैठक आयोजित नहीं हो सकी। और कानून के मुताबिक, जब तक पहली बैठक नहीं होती, सरपंच अपना कार्यभार (Charge) नहीं संभाल सकता।
प्रशासन की लाचारी और मार्गदर्शन का इंतज़ार (Administrative Helplessness)
इस प्रशासनिक गतिरोध (Administrative Deadlock) को सुलझाने के लिए तालुका विकास अधिकारी (TDO) ने जिला विकास अधिकारी (DDO) और फिर विकास आयुक्त (Development Commissioner) से मार्गदर्शन (Guidance) मांगा। महीनों तक फाइलें एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर घूमती रहीं, लेकिन कानून की इस अनूठी गुत्थी का कोई तोड़ नहीं निकला।
इस दौरान निर्वाचित सरपंच राकेश भाई केवल नाम के सरपंच बनकर रह गए। जब ग्रामीण अपनी समस्याओं (Problems) जैसे पानी, सड़क या स्ट्रीट लाइट को लेकर उनके पास जाते, तो उनका एक ही जवाब होता— “मेरे पास अभी तक चार्ज ही नहीं है।”
ग्रामीणों का आक्रोश और अंतिम समाधान (Public Outrage & Final Solution)
पिछले 6 महीनों से गांव का पूरा कामकाज तलाटी (Talati) के भरोसे चल रहा था, जिससे विकास कार्य ठप (Stalled) पड़े थे। जनता का गुस्सा बढ़ता देख और जनभावना (Public Sentiment) का सम्मान करते हुए, जिला प्रशासन ने आखिरकार एक बड़ा फैसला लिया।
उप जिला विकास अधिकारी (Deputy DDO) ने आधिकारिक पुष्टि की है कि इंद्राल ग्राम पंचायत के सुचारू संचालन के लिए अब एक प्रशासक (Administrator) नियुक्त कर दिया गया है। संखेड़ा तालुका पंचायत विस्तार अधिकारी हिरेन आर. पटेल को वहां का कार्यभार सौंपा गया है।
क्या कहता है कानून? (What does the Law say?)
गुजरात पंचायत अधिनियम के तहत, यदि किसी पंचायत में सदस्यों का चुनाव नहीं हो पाता है, तो सरकार वहां ‘प्रशासक’ नियुक्त कर सकती है। हालांकि, निर्वाचित सरपंच होने के बावजूद ऐसी स्थिति पैदा होना बहुत दुर्लभ (Rare) है। अब जब तक वार्ड सदस्यों के लिए पुन: चुनाव (Re-election) नहीं हो जाते और कोरम पूरा नहीं होता, तब तक निर्वाचित सरपंच को सत्ता के लिए इंतज़ार करना होगा।
यह घटना प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती और चुनावी प्रक्रिया में उम्मीदवारों की कमी के कारण पैदा होने वाले संकट का एक बड़ा उदाहरण (Example) बन गई है।
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