गांधीनगर: गुजरात में एक ओर सरकार कृषि राहत सहायता और किसान कल्याण योजनाओं के जरिए किसानों की खुशहाली का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर भारतीय किसान संघ ने सरकार के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। किसान संघ का आरोप है कि सरकार किसानों की समस्याओं की लगातार अनदेखी कर रही है, जिससे राज्य के अन्नदाताओं में भारी आक्रोश है। इसी विरोध स्वरूप 12 जनवरी को राजधानी गांधीनगर में राज्यव्यापी बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया गया है।
खाद की किल्लत और लंबी कतारें
सरकार का दावा है कि गुजरात में खाद (Fertilizer) का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। किसान संघ के अनुसार, किसानों को खाद पाने के लिए कड़कड़ाती ठंड में घंटों लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। बेमौसम बारिश के कारण खरीफ की फसल पहले ही बर्बाद हो चुकी है, और अब रबी सीजन में खाद की किल्लत किसानों की कमर तोड़ रही है।
फसल के दाम और कर्ज का बोझ
किसानों की नाराजगी के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
उचित दाम का अभाव: कड़ी मेहनत के बाद भी किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य नहीं मिल रहा है। मजबूरन उन्हें लागत से कम दाम पर फसल बेचनी पड़ रही है।
लोन की समस्या: बैंकों से समय पर कृषि ऋण (Loan) नहीं मिल पा रहा है।
APMC की बदहाली: मंडियों के बाहर अपनी फसल बेचने के लिए किसानों को रातें जागकर बितानी पड़ रही हैं।
25 हजार किसानों के जुटने का अनुमान
अपनी मांगों को अनसुना किए जाने से नाराज किसान संघ ने 12 जनवरी को गांधीनगर में 20 से 25 हजार किसानों को जुटाने का लक्ष्य रखा है। किसानों का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन खराब हो रही है और वे कर्ज के दलदल में फंसते जा रहे हैं। अपनी इसी व्यथा को सरकार तक पहुंचाने के लिए किसानों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
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