ढाका/जेस्सोर (Bangladesh News): पड़ोसी देश बांग्लादेश से एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। सोमवार, 5 जनवरी 2026 की दोपहर को जेस्सोर (Jessore) जिले के मोनिरामपुर में एक हिंदू युवक, राणा प्रताप बैरागी (Rana Pratap Bairagi) की कट्टरपंथियों ने सरेआम गोली मारकर हत्या (Murder) कर दी।
यह घटना केवल एक हत्या नहीं है, बल्कि बांग्लादेश में रह रहे हिंदू अल्पसंख्यकों (Hindu Minorities) के खिलाफ बढ़ती नफरत और हिंसा की कड़ी का एक और काला अध्याय है। पिछले 3 हफ्तों के भीतर यह 5वीं ऐसी वारदात है जिसने इलाके में असुरक्षा (Insecurity) और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
1. घटना का विवरण: सरेआम गोलीबारी (The Fatal Incident)
स्थानीय मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, राणा प्रताप बैरागी अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे, तभी अचानक अज्ञात कट्टरपंथियों (Radicals) ने उन पर हमला बोल दिया।
अचानक हमला: हमलावरों ने बेहद करीब से राणा प्रताप पर गोलियां बरसाईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
दहशत का माहौल: दिनदहाड़े हुई इस वारदात के बाद मोनिरामपुर बाजार और आसपास के हिंदू इलाकों में सन्नाटा पसर गया है। लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर निकलने में भी कतरा रहे हैं।
2. 3 हफ्ते में 5वीं वारदात: एक खतरनाक पैटर्न (A Dangerous Pattern)
बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के आने के बाद से हिंदुओं के खिलाफ हिंसा में कमी आने के बजाय बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। पिछले 21 दिनों का रिकॉर्ड डराने वाला है:
लगातार हमले: राणा प्रताप की हत्या इस महीने की ऐसी 5वीं घटना है जहाँ हिंदू समुदाय (Hindu Community) के किसी व्यक्ति को निशाना बनाया गया है।
चुनावी माहौल (Election Atmosphere): बांग्लादेश में चुनाव करीब हैं, और इतिहास गवाह है कि चुनाव के समय वहां अल्पसंख्यकों पर हमले तेज हो जाते हैं। कट्टरपंथी ताकतें (Extremist Forces) सांप्रदायिक ध्रुवीकरण (Communal Polarization) के जरिए डर फैलाना चाहती हैं।
3. प्रशासन की भूमिका और चुप्पी (Silence of the Interim Government)
मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मानवाधिकारों (Human Rights) की बात करने वाले वैश्विक मंचों पर तो सरकार सक्रिय है, लेकिन जमीनी स्तर पर जिहादियों (Jihadists) के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं।
पुलिसिया जांच (Police Investigation): घटना के बाद जेस्सोर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लिया। पुलिस का कहना है कि वे हमलावरों की पहचान (Identification) करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक किसी बड़े अपराधी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
सरकार की चुप्पी: लगातार हो रही हत्याओं पर सरकार की ओर से कोई कड़ा रुख (Strict Stance) न अपनाना कट्टरपंथियों को और शह दे रहा है।
4. मानवाधिकार संगठनों की चिंता (Global Human Rights Concerns)
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाले कई हिंदू संगठनों और मानवाधिकार समूहों (Human Rights Groups) ने बांग्लादेश में ‘हिंदू नरसंहार’ (Hindu Genocide) जैसी स्थिति की आशंका जताई है।
असुरक्षा की भावना: मंदिर तोड़े जाने, मारपीट और अब सीधे हत्याओं (Killings) ने बांग्लादेशी हिंदुओं को पलायन (Migration) के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव: भारत सरकार और वैश्विक निकायों (Global Bodies) से लगातार यह मांग की जा रही है कि वे बांग्लादेशी प्रशासन पर दबाव डालें ताकि हिंदुओं की जान-माल की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
राणा प्रताप बैरागी की हत्या उस गहरी जड़ जमा चुकी नफरत का नतीजा है जिसे वक्त रहते नहीं रोका गया। यदि बांग्लादेशी प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इन जिहादी तत्वों (Jihadi Elements) पर नकेल नहीं कसी, तो आने वाले समय में अल्पसंख्यकों का वहां रहना नामुमकिन हो जाएगा। न्याय केवल कागजों पर नहीं, बल्कि अपराधियों को फांसी के फंदे तक पहुँचाने से ही दिखेगा।
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