सूरत | 02 जनवरी 2026 :जब पूरा सूरत शहर 31 दिसंबर की रात नए साल के जश्न की तैयारियों में डूबा था, तब शहर के अमरोली इलाके में एक खौफनाक खेल खेला जा रहा था। सूरत पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक ऐसी गैंग का पर्दाफाश किया है, जो सोशल मीडिया पर ‘वॉशिंग पाउडर’ के नाम से जानलेवा ड्रग्स बेच रही थी। यह कहानी किसी को भी झकझोर सकती है, क्योंकि इसमें ‘निरमा’ और ‘टाइड’ जैसे घरेलू नामों का इस्तेमाल कर युवा पीढ़ी को नशे के दलदल में धकेलने की गहरी साजिश रची गई थी।
कोडवर्ड की मायाजाल: ‘निरमा’ मतलब हाई-क्वालिटी ड्रग्स!
पुलिस जांच में जो सबसे हैरान करने वाली बात सामने आई, वह थी इन ड्रग्स माफियाओं की ‘मोडस ऑपरेंडी’। गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे पुलिस की पैनी नजर से बचने के लिए खास कोडवर्ड्स का इस्तेमाल करते थे:
निरमा (Nirma): अगर कोई ग्राहक चैट पर ‘निरमा’ मांगता, तो इसका मतलब था हाई प्योरिटी वाला ‘म्याऊं-म्याऊं’ यानी मेफेड्रोन ड्रग्स।
टाइड (Tide): इस कोडवर्ड का इस्तेमाल दूसरे दर्जे की या कम शुद्धता वाली ड्रग्स के लिए किया जाता था।
दवा और ओजी (OG): अन्य नशीले पदार्थों के लिए इन शब्दों का उपयोग होता था।
नशे का यह काला कारोबार इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म पर फल-फूल रहा था। आरोपी इतने शातिर थे कि पकड़े जाने के डर से वे सामान्य फोन कॉल के बजाय व्हाट्सएप या स्नैपचैट की इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल करते थे ताकि उनका लोकेशन ट्रेस न हो सके।
कैसे पकड़ा गया नेटवर्क?
31 दिसंबर की रात, जब पुलिस कमिश्नर के आदेश पर पूरा शहर सुरक्षा के कड़े घेरे में था, तब SOG के डीसीपी राजदीप सिंह नकुम को सूचना मिली कि अमरोली के छापराभाठा इलाके में एक युवक ड्रग्स की डिलीवरी करने वाला है। पुलिस ने जाल बिछाया और 21 वर्षीय जील भूपतभाई ठुम्मर को धर दबोचा।
तलाशी के दौरान जील के पास से 236.780 ग्राम खतरनाक सिंथेटिक ड्रग ‘म्याऊं-म्याऊं’ (MD) बरामद हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 7.10 लाख रुपये बताई जा रही है।
मोहरा गिरफ्तार, मुख्य सरगना अब भी फरार
पूछताछ में जील ने खुलासा किया कि वह इस रैकेट का सिर्फ एक मामूली मोहरा है। वह पहले कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करता था, लेकिन खुद नशे का आदी होने के बाद अपने शौक पूरे करने के लिए ‘डिलीवरी बॉय’ बन गया। उसने बताया कि इस पूरे नेटवर्क के असली मास्टरमाइंड खुशाल वल्लभभाई राणपरिया और भरत उर्फ भाणो दामजीभाई लाठिया हैं। फिलहाल ये दोनों फरार हैं और पुलिस ने उन्हें वांटेड घोषित कर दिया है।
क्या है यह ‘म्याऊं-म्याऊं’ ड्रग्स?
मेफेड्रोन, जिसे आम भाषा में ‘म्याऊं-म्याऊं’ कहा जाता है, एक घातक सिंथेटिक ड्रग है। यह सीधे मस्तिष्क पर असर करता है और इंसान को कुछ समय के लिए अत्यधिक उत्तेजित कर देता है, लेकिन इसके परिणाम जानलेवा हैं। इसके सेवन से हार्ट अटैक, पैरालिसिस और मानसिक संतुलन खोने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। भारत में 2015 से इस पर प्रतिबंध है।
सूरत पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस ड्रग्स की सप्लाई कहां से हो रही थी और इस नेटवर्क के तार और किन-किन शहरों से जुड़े हैं।
मामले की मुख्य जानकारी:
| विवरण | जानकारी |
| बरामद ड्रग्स | 236.780 ग्राम मेफेड्रोन (MD) |
| बाजार मूल्य | लगभग 7.10 लाख रुपये |
| मुख्य आरोपी | जील ठुम्मर (गिरफ्तार), खुशाल और भरत (फरार) |
| इलाका | छापराभाठा, अमरोली, सूरत |
