भारत सरकार की प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना (PM Vishwakarma Yojana) देश के उन लाखों पारंपरिक शिल्पकारों और छोटे कामगारों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रही है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपने हुनर से समाज की सेवा कर रहे हैं। साल 2023 में शुरू हुई यह महत्वाकांक्षी योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि देश के कारीगरों को आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजार से जोड़ने का काम भी कर रही है।
योजना का मुख्य उद्देश्य
इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य सुनार, लोहार, कुम्हार और राजमिस्त्री जैसे 18 अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े कारीगरों के उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना है। सरकार चाहती है कि ये पारंपरिक कामगार नई मशीनों और आधुनिक कौशल से लैस होकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।
योजना के शानदार लाभ: ट्रेनिंग से लेकर टूलकिट तक
पीएम विश्वकर्मा योजना केवल एक ऋण योजना नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण विकास पैकेज है:
1. एडवांस स्किल ट्रेनिंग और स्टाइपंड
लाभार्थियों को आधुनिक तकनीकों से रूबरू कराने के लिए सरकार ‘बेसिक’ और ‘एडवांस’ ट्रेनिंग प्रदान करती है। सबसे अच्छी बात यह है कि ट्रेनिंग के दौरान कामगारों की दिहाड़ी का नुकसान न हो, इसके लिए सरकार 500 रुपये प्रतिदिन का स्टाइपंड (भत्ता) प्रदान करती है।
2. टूलकिट के लिए 15,000 रुपये की सहायता
ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद, सरकार कारीगरों को आधुनिक औजार खरीदने के लिए 15,000 रुपये की ई-वाउचर या प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजती है।
3. मात्र 5% ब्याज पर 3 लाख का लोन
अपना व्यापार बढ़ाने या नई वर्कशॉप खोलने के लिए सरकार बिना किसी गारंटी के 3 लाख रुपये तक का लोन देती है। यह लोन दो चरणों में मिलता है:
पहला चरण: 1 लाख रुपये का शुरुआती लोन (18 महीने की अवधि)।
दूसरा चरण: पहले लोन के सफल भुगतान के बाद 2 लाख रुपये का अतिरिक्त लोन (30 महीने की अवधि)।
ब्याज दर: इस लोन पर ब्याज की दर मात्र 5% रखी गई है, जो किसी भी व्यावसायिक बैंक की तुलना में बेहद कम है।
इन 18 क्षेत्रों के लोग उठा सकते हैं लाभ
योजना के अंतर्गत रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े 18 पारंपरिक शिल्पों को शामिल किया गया है:
निर्माण कार्य: राजमिस्त्री (Mason)।
व्यक्तिगत सेवाएँ: नाई (Barber), दर्जी (Tailor), धोबी (Washerman)।
धातु और मिट्टी का काम: लोहार (Blacksmith), सुनार (Goldsmith), कुम्हार (Potter), ताला बनाने वाले।
चर्म कार्य: मोची (Shoe maker/Cobbler)।
हस्तशिल्प: टोकरी/चटाई/झाड़ू बुनने वाले, गुड़िया और खिलौने बनाने वाले।
कलात्मक कार्य: मूर्तिकार, पत्थर तराशने वाले, मालाकार (Gardener)।
समुद्री कार्य: नाव बनाने वाले, मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले।
पात्रता और आवश्यक दस्तावेज
पात्रता:
आवेदक भारत का स्थायी निवासी होना चाहिए।
आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
आवेदक स्वरोजगार में लगा होना चाहिए और उन 18 श्रेणियों में से एक का हिस्सा हो।
परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी सेवा में नहीं होना चाहिए।
आवश्यक दस्तावेज:
आधार कार्ड (मोबाइल नंबर से लिंक)।
बैंक पासबुक की फोटोकॉपी।
व्यवसाय से संबंधित प्रमाण/दस्तावेज।
राशन कार्ड और पहचान पत्र।
आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Process)
पंजीकरण: सबसे पहले अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) पर जाएं।
सत्यापन: पीएम विश्वकर्मा पोर्टल पर आधार बायोमेट्रिक के जरिए अपना पंजीकरण कराएं।
कौशल सत्यापन: आपके द्वारा दी गई जानकारी का ग्राम पंचायत या शहरी स्थानीय निकाय के स्तर पर सत्यापन होगा।
प्रशिक्षण: सत्यापन के बाद आपको ट्रेनिंग के लिए बुलाया जाएगा।
प्रमाण पत्र: ट्रेनिंग पूरी होने पर आपको एक ‘विश्वकर्मा प्रमाणपत्र’ और आईडी कार्ड मिलेगा, जिसके बाद आप लोन और टूलकिट राशि के हकदार बन जाएंगे।
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