2026 की शुरुआत दुनिया के लिए किसी डरावने सपने जैसी रही है। आज हम उस मोड़ पर खड़े हैं जहाँ युद्ध अब कोई अनहोनी घटना नहीं, बल्कि एक डरावनी वास्तविकता (reality) बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि तीसरा विश्वयुद्ध (World War 3) शायद किसी एक बड़े धमाके से शुरू न होकर छोटे-छोटे टुकड़ों में शुरू हो चुका है।
डोनाल्ड ट्रंप और ‘डिपार्टमेंट ऑफ वॉर’ (Department of War)
वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप (military intervention) के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुराने बयानों को अब संजीदगी से लिया जा रहा है। ट्रंप ने अपने रक्षा विभाग (Defense Department) का नाम बदलकर ‘डिपार्टमेंट ऑफ वॉर’ रख दिया है, जो स्पष्ट संकेत है कि अमेरिका अब रक्षात्मक (defensive) नहीं, बल्कि आक्रामक (offensive) मोड में है। ग्रीनलैंड को खरीदने की बात हो या मेक्सिको, पनामा और नाइजीरिया को सैन्य कार्रवाई की धमकी देना—ट्रंप की नजर में राष्ट्रों की संप्रभुता (sovereignty) अब मोलभाव की चीज बन गई है।
चीन की अति-महत्वाकांक्षा (Ambitious China)
एशिया में चीन ने ताइवान के चारों ओर घेराबंदी (blockade) कर ली है। चीनी नेतृत्व का स्पष्ट कहना है कि वे ताइवान के अधिग्रहण (annexation) के लिए सेना के इस्तेमाल से पीछे नहीं हटेंगे। इसके अलावा, दक्षिण चीन सागर (South China Sea) और भारत के अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) की सीमाओं पर चीन की गतिविधियां लगातार तनाव बढ़ा रही हैं। चीन की असली तैयारी अमेरिका को चुनौती देने की है, जिससे वैश्विक शक्ति संतुलन (balance of power) बिगड़ रहा है।
रूस-यूक्रेन और नाटो (Russia-Ukraine & NATO)
पिछले चार वर्षों से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को दो खेमों में बाँट दिया है। व्लादिमीर पुतिन इसे रूस की सुरक्षा और NATO के विस्तार को रोकने की मजबूरी बताते हैं। इस युद्ध ने पोलैंड और फिनलैंड जैसे यूरोपीय देशों के मन में भी खौफ पैदा कर दिया है, जिससे पूरा यूरोप एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा नजर आ रहा है।
मिडिल ईस्ट और इजरायल का ‘फाइनल टारगेट’ (Final Target of Israel)
मध्य पूर्व (Middle East) में इजरायल ने हमास और हिजबुल्लाह को निशाना बनाने के बाद अब अपना रुख ईरान की ओर कर लिया है। 2026 ईरान के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। विशेषज्ञों को डर है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन (regime change) की कोशिशें वेनेजुएला की तरह शांतिपूर्ण नहीं, बल्कि भीषण रक्तपात (bloodshed) वाली होंगी।
परमाणु हथियारों की धमकी (Nuclear Threats)
आज परमाणु हथियार (nuclear weapons) युद्ध को रोकने के बजाय डराने का औजार बन गए हैं। अमेरिका द्वारा फिर से परमाणु परीक्षण (nuclear testing) की बात करना और रूस-चीन का अपनी शक्ति प्रदर्शन करना, दुनिया को महाविनाश (total destruction) की ओर धकेल रहा है। सबसे दुखद पहलू यह है कि संयुक्त राष्ट्र (United Nations) जैसी संस्थाएं आज बेबस और कमजोर नजर आ रही हैं।
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