पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया और समाचारों में हमने ऐसे कई विचलित करने वाले वीडियो देखे हैं—कहीं कोई जिम में कसरत करते हुए गिर पड़ा, कहीं शादी में नाचते हुए युवक की जान चली गई, तो कहीं कोई हंसते-खेलते अचानक शांत हो गया। इन घटनाओं ने आम जनता के मन में एक गहरा डर और ‘कोविड वैक्सीन’ जैसे कई संदेह पैदा किए थे। इन आशंकाओं को वैज्ञानिक आधार पर समझने के लिए AIIMS (नई दिल्ली) के विशेषज्ञों ने एक साल तक गहन शोध किया।
मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच की गई यह स्टडी हाल ही में ‘इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ में प्रकाशित हुई है। यह रिपोर्ट न केवल डराने वाली है, बल्कि हमारी जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति हमारी लापरवाही पर एक गंभीर सवालिया निशान भी लगाती है।
1. किसे माना गया ‘सडन डेथ’?
चिकित्सा विज्ञान की भाषा में ‘सडन डेथ’ या अचानक मौत को परिभाषित करना आवश्यक था। AIIMS ने इस स्टडी के लिए दो मुख्य मानक तय किए:
वे मामले जिनमें बीमारी के लक्षण दिखने के एक घंटे के भीतर व्यक्ति की मृत्यु हो गई।
वे मामले जिन्हें मरते हुए किसी ने नहीं देखा, लेकिन वे मृत्यु से 24 घंटे पहले पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य दिख रहे थे।
अध्ययन के दौरान कुल 2,214 पोस्टमॉर्टम किए गए, जिनमें से 180 मामले (8.1%) अचानक होने वाली मौतों की श्रेणी में पाए गए।
2. उम्र और लिंग का घातक गणित: युवा सबसे ज्यादा निशाने पर
इस रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि अचानक मौत का शिकार होने वालों में बुजुर्गों से कहीं ज्यादा संख्या युवाओं की है।
युवा वर्ग का संकट: कुल 180 मामलों में से 103 (57.2%) मौतें 18 से 45 वर्ष के आयु वर्ग में हुईं। यह वह उम्र है जिसे जीवन का सबसे ऊर्जावान समय माना जाता है।
पुरुष बनाम महिला: स्टडी में लिंग के आधार पर एक भारी असंतुलन देखा गया। अचानक होने वाली मौतों में पुरुष और महिला का अनुपात 4.5:1 पाया गया।
18-45 की उम्र में मरने वालों में 77 पुरुष और 17 महिलाएं थीं।
46-65 की उम्र में यह अंतर और बढ़ गया, जहाँ 64 पुरुषों के मुकाबले केवल 4 महिलाओं की मौत हुई।
इससे यह संकेत मिलता है कि पुरुष जैविक या जीवनशैली (तनाव, खान-पान) के कारणों से अधिक जोखिम में हैं।
3. ‘दिल’ का धोखा: मौत की सबसे बड़ी वजह
पोस्टमॉर्टम रिपोर्टों के गहराई से विश्लेषण के बाद यह स्पष्ट हुआ कि अधिकांश मौतों का केंद्र ‘हृदय’ था।
कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD): लगभग 42.6% मामलों में हृदय संबंधी समस्याएं ही मौत का कारण बनीं। इसमें सबसे प्रमुख थी धमनियों का संकुचन।
ब्लॉकेज का स्तर: डॉक्टरों ने पाया कि जिन युवाओं की मौत हुई, उनकी धमनियों में 70% या उससे अधिक का ब्लॉकेज था। यह बेहद चिंताजनक है क्योंकि इतने गंभीर ब्लॉकेज के बावजूद उन युवाओं को पहले कभी कोई लक्षण महसूस नहीं हुए थे।
फेफड़ों की समस्या: हृदय के बाद दूसरा सबसे बड़ा कारण सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां रहीं, जो 21.3% मामलों में देखी गईं।
4. जीवनशैली के दुश्मन: धूम्रपान और शराब
AIIMS की रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि ये मौतें ‘अचानक’ तो दिखीं, लेकिन इनके पीछे वर्षों की खराब आदतें छिपी थीं।
धूम्रपान (Smoking): मरने वाले युवाओं में से 57.4% नियमित या भारी धूम्रपान करने वाले थे। तंबाकू धमनियों को सख्त बनाता है और रक्त के थक्के (Clots) बनने की संभावना बढ़ा देता है।
शराब (Alcohol): लगभग 52% मृतक नियमित या कभी-कभी शराब का सेवन करते थे। शराब और धूम्रपान का यह घातक संयोजन हृदय पर दोहरा दबाव डालता है।
5. समय, स्थान और दिन: कब और कहाँ होता है हमला?
स्टडी में मौतों के पैटर्न को समझने के लिए समय और स्थान का भी बारीकी से अध्ययन किया गया।
| श्रेणी | विवरण और प्रतिशत |
| सबसे घातक दिन | रिपोर्ट के अनुसार, सप्ताह के मध्य में यानी बुधवार और गुरुवार को सबसे अधिक मौतें दर्ज की गईं। |
| समय का प्रभाव | 40.1% मौतें रात के आखिरी पहर या सुबह जल्दी (Early Morning) हुईं। 30.2% सुबह के समय हुईं। |
| स्थान | 55% मौतें घर पर हुईं। 30.2% यात्रा के दौरान और 14.8% कार्यस्थल या सार्वजनिक स्थानों पर हुईं। |
| मौसम | मौसम का कोई विशेष प्रभाव नहीं दिखा; मौतें साल भर लगभग समान रूप से बंटी हुई थीं। |
6. चेतावनी के संकेत (Warning Signs)
हालांकि ये मौतें अचानक हुईं, लेकिन जांच में पाया गया कि शरीर ने अंत समय में कुछ संकेत दिए थे जिन्हें अक्सर लोग पहचान नहीं पाते:
अचानक बेहोशी: अधिकांश मामलों में व्यक्ति अचानक बेहोश होकर गिर पड़ा।
सीने में दर्द और भारीपन: कुछ ने असहजता की शिकायत की थी।
घबराहट और पसीना: अचानक बिना कारण पसीना आना और सांस लेने में तकलीफ।
पेट दर्द और उल्टी: कई बार लोग इसे गैस या अपच समझ लेते हैं, जबकि यह साइलेंट हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है।
एक गंभीर चेतावनी
AIIMS की यह स्टडी एक कड़वी सच्चाई हमारे सामने रखती है। जो युवा खुद को स्वस्थ समझ रहे हैं, उनके शरीर के भीतर धमनियों में ब्लॉकेज पनप रहा है। बुजुर्गों में अक्सर मधुमेह (Diabetes) और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां पहले से मौजूद होती हैं, जिससे वे सचेत रहते हैं। लेकिन युवाओं में बिना किसी पिछली बीमारी के इस तरह धमनियों का 70% तक ब्लॉक होना एक ‘हेल्थ इमरजेंसी’ की ओर इशारा करता है।
बचाव के उपाय:
नियमित अंतराल पर ‘हृदय की जांच’ (Cardiac Checkup) करवाएं, भले ही आप स्वस्थ महसूस कर रहे हों।
धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरी बनाएं।
तनाव प्रबंधन और संतुलित आहार को प्राथमिकता दें।
